Book Title: Ghantakarn Kalp
Author(s): Chandanmal Nagori
Publisher: Chandanmal Nagori Jain Pustakalay

View full book text
Previous | Next

Page 60
________________ 2 ऊँ घंटाकर्ण महावीर, सर्व व्याधि विनाशकः ।। विस्फोटक भयं प्राप्ते, रक्ष रक्ष महाबल ॥ १ ॥ श्री घटाकर्ण देव यंत्र नाकाले मरणं तस्य न च सर्पण दस्यते ।। अग्नि चोर.भयं नास्ति, ह्रीं घंटाकर्ण नमोस्तुते ।। ४ ।। ठः ठः ठः स्वाहाः ॥ मात्रुनार मवेकानमः रोगास्तत्र प्रणश्यति, वात-पित्त-कफोद्भवाः ॥ २ ॥ यन्न त्वं तिष्ट से देव, लिखितोऽक्षर पंक्तिभिः ।। रोरीरुनमः TIPS OM शाकिनी भूत वैताल, राक्षसा प्रभवन्ति नः ॥ ३ ॥ तत्र राजभयं नास्ति, यांति करणे जपा क्षयं ॥ Shree Sudharmaswami

Loading...

Page Navigation
1 ... 58 59 60 61 62 63 64 65 66 67 68 69 70 71 72