Book Title: Ghantakarn Kalp
Author(s): Chandanmal Nagori
Publisher: Chandanmal Nagori Jain Pustakalay

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Page 18
________________ घंटाकर्ण-कल्प घंटाकर्ण देव का स्वरूप घंटाकर्ण देव का स्वरूप वीरता के लक्षण वाला है और मुखाकृति देखते उग्र स्वभावी जान पड़ते हैं । असल स्वरूप में घंटा कर्णदेव के पांव का मोड़ भुजदण्ड का घुमाव भृकुटि व नेत्र में तेजस्विता और शरीर का आकार देखते संपूर्ण वीरता दिखती है । वीर पुरुषों के लक्षण की व्याख्या करते ग्रन्थकारों ने दाहिना अंग मुख्य माना है और बल-स्फुर्ति-वीरता के कार्य दाहिने हाथ से किये जाते हैं, इसीलिए बायें हाथ में धनुष रहता है और दाहिने हाथ से बाण ( तीर ) चलाते हैं, और यू देखें Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com

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