Book Title: Ghantakarn Kalp
Author(s): Chandanmal Nagori
Publisher: Chandanmal Nagori Jain Pustakalay

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Page 6
________________ ____ ** विज्ञप्ति * घंटाकर्ण-कल्प प्रकाशित कराने का विचार कई वर्षों से हो रहा था, और लगभग पन्द्रह वर्ष पहले हस्त पत्र भी छपवाये थे, और दरम्यान में दो-तीन बार जाहेरात भी छपवाई थी परन्तु कई तरह की कठिनाइयों के कारण प्रसिद्ध नहीं करा सके । घंटाकर्ण का यह वर्णन पुरानी प्रत से लिखा गया है, जिसमें संवत् का उल्लेख नहीं है और दूसरी प्रत जो संवत् १६०८ की लिखी हुई है उससे मिलान किया गया है, और मन्त्र महिमा प्रकरण में जो वर्णन है उसमें कुछ भाग श्रीमान् योग-निष्ठ जैनाचार्य श्री बुद्धिसागर सूरीश्वरजी महाराज साहेब के लेखों पर से लिया गया है चित्र आदि भी पुरानी प्रतों पर से तैयार कराये हैं, इस तरह से संकलना कर पुस्तक प्रकाशित की गई जिसका श्रेय उन्हीं प्राप्त पुरुषों को है कि जिनकी कृतियों पर से यह संकलना की गई है, फिर भी त्रुटियां रह जाना सम्भव है अतः पाठकों की दृष्टि में आवे तो सुधार लेवें । इस पुस्तक के प्रकाशन में पूज्यपाद मुनि महाराज श्री जिनभद्रविजयजी साहब ने प्रोत्साहित किया है जिनका विशेष आभार मानता हूं। निवेदक२००८ आसाढ़ सुदि १५ . . चन्दनमल नागोरी जयपुर (राजस्थान) छोटी सादडी (मेवाड़) Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com

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