Book Title: Dandak Tatha Laghu Sangrahani
Author(s): Shravak Bhimsinh Manek
Publisher: Shravak Bhimsinh Manek
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णनअसयं खंमाणं, नरदपमाणेण नाइए लख्खे ॥अहवा णउयसयगुणं, नरहपमाणं हवश्वरकं
गाथा ३ त्रीजीना छुटा शब्दना अर्थ. णउअसयं-एकसो ने नेवु. उणसयगुणं-एकसो ने नेवू खंडाणं-खांडुआ.
गणुं. भरहपमाणेण-भरतक्षेत्रना प्रमाणे..
भरह पमाणं-भरतक्षेत्रनुं प्रमाण. भाइए-भागाकार करीए. लक्खे-लाख.
हवइ-थाय, अहवा-अथवा.
लक्ख-लाख. विस्तारार्थः-या जंबूदीप ते (लके के० ) लदे, एटले एक लाख योजननो बे, ते(ने) पांचसे उवीश यो. जन अने ड कलानु घनुष्याकारे (जरहपमाणेण के०) जरतक्षेत्रनुं प्रमाण , तेणे करीने (जाइए के) नाजिते, एटले नांजीए एटले नागाकार करीए, तो (उअसयं खंमाणं के० ) नवतिशतं खंमानां, एटले एकसो ने नेवू खांमुया थाय. (अहवा के) अथवा, (पउयसय गुणं के०) नवतिशतगुणं, एटले एकसो नेवं गणु (जरहपमाणं के० ) जरतक्षेत्रनुं प्रमाण करीए, एटले पांचसें बवीश योजन ने उ कलाने एकसो ने नेबुंथी गुणीए तो ( लक्खं के०) लदं, एटले एक लाख योजन (हवश् के० ) जवति, एटले थाय ॥३॥

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