Book Title: Dandak Tatha Laghu Sangrahani
Author(s): Shravak Bhimsinh Manek
Publisher: Shravak Bhimsinh Manek
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विद्याहरअनिगिये, सढी मुन्नि मुन्निवेयने ॥श्य चनगुण चऊतीसा, बतीससयं तु सेढीणं ॥१॥
गाथा १९ मीना छुटा शब्दना अर्थ. विद्याहर-विद्याधर. |चउगुण-चार गुणा करतां. अभिओगिय-आभियोगिक, चउतीशा-चोत्रीश. सेढीओ-श्रेणिओ.
छत्तीससयं-एकसो ने छत्रीश. डुनि डुनि-बे वे.
तु-वली. वेयडे-वैताढ्यने विषे. सेहीण-श्रेणिओ. इय- ए रीते.
विस्तारार्थः-( वेयले के०) वैताढये, एटले वै. ताढयने विषे एक ( विधाहर अनियोगियसेढीओ के ) विद्याधरानियौगिक श्रेण्यौ, एटले विद्याधर अने बीजा अनियोगिक देवोनी श्रेणि (मुन्नी मुन्नी के०)
हे, एटले बे बे . एटले एकेका वैताढयनी उपर बे श्रेणि विद्याधरोनी अने बे श्रेणि आजियोगिक देवोनी मलीने चार चार श्रेणि बे, त्यारे (श्य के) इति, एटले था प्रमाणे (चतीसा के०) चतुस्त्रिंशत् ,

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