Book Title: Dandak Tatha Laghu Sangrahani
Author(s): Shravak Bhimsinh Manek
Publisher: Shravak Bhimsinh Manek

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Page 161
________________ गंगा-गंगा. सिंधू- सिंधु ३४ गाथा - २१ मीना छुटा शब्दना अर्थ. रत्ता-रक्ता रत्तवइ - रक्तवती चउ-चार नइओ - नदीओ | पत्तेयं - प्रत्येके चउदसहिं सहस्सेहिं-चौद हजार नदीओना परिवारे समगं-साथे वचंति-मले छे, जाय जलहिम्मि- समुद्रमां छे विस्तारार्थ :- जंबूद्वीपमादे दक्षिण दिशावर्त्ती जरत नामे विजयमां एक (गंगा के०) गंगा, एटले गंगा अने बीजी (सिंधू के० ) सिंधुः, एटले सिंधु ए बे नदी बे, तथा जंबूद्वीपमांहे उत्तर दिशाए ऐरवत नामे विजयमां एक (रता के० ) रक्ता, अने बीजी ( रत्तवई ho ) रक्तवती, र बे नदी बे. एम (चन के० ) चत सुः, एटले चार ( न के० ) नद्यः, एटले नदीजं ते ( पत्तेयं के० ) प्रत्येकं, एटले प्रत्येके एकेकी नदी (च उदसहिं सहस्सेहिं के० ) चतुर्दशभिः सहस्रैः, एटले चौद हजार नदीना परिवारे छे, तेनीं (समगं के० ) समकं, एटले साथे अर्थात बप्पन हजार नदी उनी साथे ( जल हिम्मि के० ) जलधौ, एटले समुद्रमादे

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