Book Title: Dandak Tatha Laghu Sangrahani
Author(s): Shravak Bhimsinh Manek
Publisher: Shravak Bhimsinh Manek
View full book text
________________
हवे जंबुद्धीपने विषे केटलां वासक्षेत्र छे ? तेनु त्रीजु द्वार तथा
पर्वतो केटला छे १ तेनुं चो) द्वार कहे छे. नरदाइ सत्त वासा, वियचन चनर (ति) तिस वमियरे ॥ सोलसवस्कारगिरि, दो चित्तविचित्त दो जमगा॥११॥
गाथा ११ मीना छुटा शब्दना अर्थ. भरहाइ-भरतादिक. वस्कारगिरि-वकारा पर्वत. सत्त वासा-सात वासक्षेत्र. दो-बे. वियद्-चउ-वाटला वैताढ्य चार. चित्तविचित्त-चित्र विचित्र. चउरतिस-चोत्रीश.. दो-बे. वडियरे-वाटला वैताव्यथी बीजा. जमगा-जमग अने समग. सोलस-सोल.
विस्तारार्थः-(जरहा सत्तवासा के0) जरतादोनि सप्त वर्षाणि, एटले जरतादि सात वासक्षेत्र के तेनां नाम कहे . एक नरत, बीजं हिमवंत, त्रीजु हरिवर्ष, चोधुं महाविदेह, पांचमुं रम्यक, बहुं हिरएयवंत अने सातमुं ऐरवत, ए त्रीजु क्षेत्रछार का.
तत्र.

Page Navigation
1 ... 145 146 147 148 149 150 151 152 153 154 155 156 157 158 159 160 161 162 163 164 165 166 167 168 169 170 171 172 173 174