Book Title: Avashyakaniryuktidipika Part_1 Author(s): Manekyashekharsuri Publisher: Vijaydansuri Jain Granthmala Surat View full book textPage 2
________________ निवेदन। आवश्यक नियुक्ति दीपिका निवेदन । मने जणावतां अति हर्ष थाय छे के सदरहु प्रन्थमाला जेओश्रीना पुण्यनामना स्मरणार्थे मारा तरफथी शरु करवामां आवी छे एओश्रीना प्रबल पुण्योदयथी खेंचाइने एओश्रीना समुदाय तरफथी मने सारो साथ मळ्यो अने दोढ वर्ष जेटला टुंक समयमां सोळमा ग्रन्थांक तरीके आ आवश्यक नियुक्ति दीपिका' नामनो ग्रन्थ प्रथम विभागमा बहार पाडवामां आवे छे । सदरहु ग्रन्थ अद्यापि अमुद्रित छे अने ते आवश्यक नियुक्ति तथा भाष्यनी मूळ गाथाना अर्थाने टुंकाणमा समजवा इच्छनारने उपयोगी थइ पडे तेम होवाथी ज तेनुं प्रकाशन करवामां आव्यु छ । सदरहु ग्रन्थना कर्ता विषे हजी जेवू जोइए तेवू साहित्य उपलब्ध नहि थवाथी ते संबंधां कइ लखवामां आव्युं नथी। ग्रन्थनी समाप्ति थता सुधीमां जो प्राप्त थशे तो आपवामां आवशे। सदरहु ग्रन्थना प्रकाशनमा सम्पूर्ण द्रव्यनी सहाय नहि मळेली होवाथी तथा तेना बाकीना भागो प्रकाशित करवा माटे बीजी सहाय नहि मळेल होवाथी आ ग्रन्थनी उपजमांथी बाकीना भागोनुं प्रकाशन करी शकाय ते हेतुथी मूळ किंमत राखवामां आवी छ। सदरहु ग्रन्थना प्रकाशनमां द्रव्यनी सहाय पू. मुनिराज श्रीतिलकविजयजी महाराजना उपदेशथी मळेल छे तथा ते शोधवामां पू. मुनिराज श्रीमानविजयजी महाराजे परिश्रम करेल छे तेथी तेओ बन्ने पूज्योनो ग्रन्थमाला तरफथी आभार मार्नु छ अने प्रमाद तथा प्रेस दोषथी जे काइ भूल रही गइ होय ते सुधारीने वाचवा विनंति छ । एज ॥ वि. सं. १९९६ मागसर सुद् ५ सुरत मास्तर हीरालाल रणछोडभाई Jain Education Internation For Private & Personal Use Only "www.jainelibrary.orgPage Navigation
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