Book Title: Apbhramsa Bharti 2014 21
Author(s): Kamalchand Sogani
Publisher: Apbhramsa Sahitya Academy

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Page 80
________________ अपभ्रंश भारती 21 67 गणहरणिग्गंथहपणवेप्पिणु। अज्जियाहवंदणहकरेविणु। खुल्लयइंछाकारुकरेप्पिणु। सावयाहसयसमवंछेविणु। तिरियहकिउसमभाउगुरिट्ठऊ। पुणुणरिंदुणरकोट्ठिणिविट्ठऊ। पुच्छइसेणिउवीरजिणेसर। सिद्धचक्कफलुकहिपरमेसरु। ताउछलियवाणिवयआयर। णंलहरीतरंगरयणायर। - घत्ता गोइमुगणिसाहइ। अणु पडिगाहइ। हउ उद्देसु पयासइं। सिद्धचक्कविहिइट्ठिय। णिग्गयरिट्ठिय। सेणियकहमिसमासइं।।2।। इहजंवूदीउदीवहसमिद्ध। तहभरहखेत्तुजयसुप्पसिद्ध। तहिअत्थिअवंतीविसउरम्मु। जहिणरवइपालइसव्वधम्मु । जहिगामवसहिपट्टणसमाण। पट्टणहविणिज्जियसुरविमाण। णयरायरसुरहसोहाखण्ण। दोणामुहकव्वडखेडछण्ण। सरिसरतलाबकमलिणिहिपिहिय। हंसावलिसोहहिहंससहिय। गोमहिसिसंडजहिमिलियमालि। भक्खंतिइछखडकमलसालि। णीलुप्पलुवासिउबहइनीरु। धीवरहिविवज्जिउजलुगहीरु। जेवहिपंथियजहिछडरसोई। धयखीरदहियमक्करहमोइं। पहिदरकमिरियचक्खेतिकेवि। इक्खारसुपिज्जइसाउलेवि। पाणिउपावंतिपवालियाउ। दिक्खालिउथणहरबालियाउ। घत्ता तहिबिसउजिमालऊ। बहुविहमालऊ। अयरदेशकयमालऊ। जहितियसिमालऊ। अइसुकमालऊ। भवणंमालइमालऊ।।3।। जेभुवमंडलमंडलअग्गें। जयप्पहुजयसिरिमंडलअग्गें। जहिणगहइगहुमंडलकोई। अभउदानुपरमंडलकोई। जहिपुरिपवरंतरिआवंती। णिहयसणाहविहुरआवंती। जहिपहुआइपड्इअरिपातल। वसुवइलक्खणवाणवपातल। रच्छवाववणजाणइआवण। खज्जवत्थपूरेपंथावण। जहिणरविउसपढहिबहुवाणिय। सिरियणिवासवसहिबहुवाणिय।

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