Book Title: Apbhramsa Bharti 2014 21
Author(s): Kamalchand Sogani
Publisher: Apbhramsa Sahitya Academy
View full book text
________________
अपभ्रंश भारती 21
रोयसोयबहुदुक्खपउत्तऊ। कोढिउदिट्टसम्मुहआवंतऊ। वेसरिरुढउवियलियगत्तउ। सीसोवरिपलासदलछत्तउ। मुणिणिंदियउपुव्वकमभीडिऊ। ऊवराइंतहिंपावेंपीडिऊ। ढलहिचमरबहुघंटासद्दहिं। कयकालाहलुसिंगाणदहिं। गलियणासकरचरणंगुलियइं। कोढियताहणिरंतरमिलियइं। तेजंपहिएहअम्महसामिऊ। अज्जुअवंतीआउगुसाइऊ। जइकोढिउकिरिआहणिकिट्टऊ। तोविनणिवइणेहतहुफिट्टइ। बहुआडंवरेणंसिहुंचल्लइ। वाहिदेखिणियपरिणुघल्लई।
__घत्ता चल्लइणिवसुत्तहं। परियणजुत्तहं। देसदिएसविधाडवइ। अकंधागुरुरघर। अरुकंवलवर। मेलइणिवपउताडइं।।10।। मंडलवइपरमंडलुसंचहिं। रत्तपित्तरणयाउणखंचहि। मेहदाहुसहकियभंडारी। जलदोणियासयलपणिहारी। वहिरदाहुतवोलुसमप्पइ। उक्कुत्तियपावसिजवालिय। गुम्मवाहिधरसहकुटवालिय। सूरवण्णतेसूरसलक्खण। गलियसाहकियमंतवियक्खण। कच्छदाह विक्कीदलवइ। वरठियालसहरक्खहिंनरवए। पाडिहेरजेणाकीभासहि। उवरोहियजेकालउभासहिं। पित्तसुक्कणरइएंगच्छहिं। रोमविहिणअंगरहअच्छकहिं। चमरहारिमक्खियगणुजग्गउं। छत्तुधरइणासाझुडुलग्गउ। काहलतहिंजोसाणइंदावई। घंटालहिबोलुणआवइ। इयसामग्गीदेइप्याणउं। आपुणुउवराइसइंराणउ।
घत्ता
पिक्खेविणुराएंपुणुअणुराएं। मंतिहिवोलणलग्गउ। कुढिगणउंआवइ। महमणिभावइ। मयणासुंदरिजोग्गउ।।11।।
---

Page Navigation
1 ... 82 83 84 85 86 87 88 89 90 91 92 93 94 95 96 97 98 99 100 101 102 103 104 105 106 107 108 109 110 111 112 113 114 115 116 117 118 119 120 121 122 123 124 125 126