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अपभ्रंश भारती 21
लक्खण
लक्षण
कुल गुण
कुल गुण
णय
युक्ति
संपुण्ण
इह
भरहि चउद्दह कुलयर आसि
सम्पन्न यहाँ/इस भरत क्षेत्र में चौदह कुलकर
हुए
पुव्वि
'पूर्व' शास्त्रों के जानकार उत्पन्न हुए
उप्पण्ण दुखमा-सुखमा 5.1 कुलयरहं
णिवेसिय देस-गाम
कुलकरों के द्वारा स्थापित देश (जनपद) (व) ग्राम कुल, वंश गोत्र
कुल
गोत सीम
क्षेत्र
किय
किये प्रारंभ में/पहले इच्छानुकूल क्षीण हुआ/समाप्त हुआ तीसरा
5.2
तब
पुर पगाम परिगलिय तिण्णि तहि काल एम अणुकम्मेण भरहि अवयरिय
काल
इसप्रकार अनुक्रम से भरत क्षेत्र में अवतरित हुआ, आया तदनुसार (अव्यय)
जेम