Book Title: Apbhramsa Bharti 2014 21
Author(s): Kamalchand Sogani
Publisher: Apbhramsa Sahitya Academy

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Page 117
________________ 104 अपभ्रंश भारती 21 लक्खण लक्षण कुल गुण कुल गुण णय युक्ति संपुण्ण इह भरहि चउद्दह कुलयर आसि सम्पन्न यहाँ/इस भरत क्षेत्र में चौदह कुलकर हुए पुव्वि 'पूर्व' शास्त्रों के जानकार उत्पन्न हुए उप्पण्ण दुखमा-सुखमा 5.1 कुलयरहं णिवेसिय देस-गाम कुलकरों के द्वारा स्थापित देश (जनपद) (व) ग्राम कुल, वंश गोत्र कुल गोत सीम क्षेत्र किय किये प्रारंभ में/पहले इच्छानुकूल क्षीण हुआ/समाप्त हुआ तीसरा 5.2 तब पुर पगाम परिगलिय तिण्णि तहि काल एम अणुकम्मेण भरहि अवयरिय काल इसप्रकार अनुक्रम से भरत क्षेत्र में अवतरित हुआ, आया तदनुसार (अव्यय) जेम

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