Book Title: Anusandhan 2015 12 SrNo 68
Author(s): Shilchandrasuri
Publisher: Kalikal Sarvagya Shri Hemchandracharya Navam Janmashatabdi Smruti Sanskar Shikshannidhi Ahmedabad
View full book text
________________
अनुसन्धान-६८
श्रीसुन्दरसुगुण सकलकलाभण्डार; सं. – मुनि श्रीसुयशचन्द्र-सुजसचन्द्रविजयजी, प्रत - केसरबाई जैन ज्ञानमन्दिर - पाटण; अङ्क ६५, पृ. १४९
१७७. ११५. वीसलनगर(-वीसनगर) बिराजमान श्रीविजयदेवेन्द्रसूरिजी पर जोधपुरना
श्रीसङ्घ वती पं. श्रीदीपविजयजी → पं. श्रीसिद्धविजयजी द्वारा लिखित, सं. १८९६, सचित्र, राजस्थानी, पद्य, मङ्गल श्लोको बाद आदि - प्रेमे प्रणमुं भारती गणपति गुणगंभीर; सं. – मुनि श्रीसुयशचन्द्र-सुजसचन्द्रविजयजी, प्रत - आर्य जम्बूस्वामी मुक्ताबाई जैन ज्ञानमन्दिर - डभोई; अङ्क ६५, पृ. १७८-१८९, (श्रीविजयशीलचन्द्रसूरिजी द्वारा क्र. ११६ साथे मेळवीने
अपुनरावृत्त अंश ज सम्पादन). ११६. पालनपुर बिराजमान श्रीविजयदेवेन्द्रसूरिजी पर नागोरना श्रीसङ्घ वती पं.
श्रीमानसागरजी → पं. श्रीरूपेन्द्रसागरजी द्वारा लिखित, सं. १९०७, सचित्र, गुजराती, १८२ कडी, महदंशे क्र. ११५नी नकल, मङ्गल श्लोक बाद आदि - सकल गुणे करि सोहतो सकल देश शिरदार; सं. - मुनि श्रीसुयशचन्द्र-सुजसचन्द्रविजयजी, प्रत - आर्य जम्बूस्वामी मुक्ताबाई जैन
ज्ञानमन्दिर - डभोई; अङ्क ६५, पृ. १९०-२०७. ११७. अमदावाद बिराजमान श्रीविजयदेवेन्द्रसूरिजी पर जोधपुरना श्रीसङ्घ वती पं.
श्रीकल्याणविजयजीना शिष्य मुनि श्रीप्रमोदविजयजी अने मुनि श्रीरत्नविजयजी द्वारा लिखित, सं. १९१६, राजस्थानी, पद्य, लांबी गझलो धरावतो पत्र, आदि - स्वस्तिपद्मा सदा यस्य पदपद्मावशिश्रयत्; सं. - मुनि श्रीसुयशचन्द्र-सुजसचन्द्रविजयजी, प्रत - भीलडीयाजी जैन ज्ञानमन्दिर;
अङ्क ६५, पृ. २०८-२३४. ११८. साणंद बिराजमान श्रीविजयमहेन्द्रसूरिजी पर सेनापुर(-शिनोर)थी पं.
श्रीज्ञानविजयजी → मुनि श्रीहिम्मतविजयजी द्वारा लिखित, सं. १८६३, राजस्थानी-गुजराती, शरुआतनो थोडोक अंश त्रुटित, प्राप्तनी आदि - मांगें सफरि सम फिरतीक्, बाडवलोक वहां आवेंक्; सं. – मुनि श्रीसुयशचन्द्रसुजसचन्द्रविजयजी, प्रत - आर्य जम्बूस्वामी मुक्ताबाई जैन ज्ञानमन्दिर - डभोई; अङ्क ६५, पृ. २३५-२४७.

Page Navigation
1 ... 64 65 66 67 68 69 70 71 72 73 74 75 76 77 78 79 80 81 82 83 84 85 86 87 88 89 90 91 92 93 94 95 96 97 98 99 100 101 102 103 104 105 106 107 108 109 110 111 112 113 114 115 116 117 118 119 120 121 122 123 124 125 126 127 128 129 130 131 132 133 134 135 136 137 138 139 140 141 142 143 144 145 146 147