Book Title: Anusandhan 2015 12 SrNo 68
Author(s): Shilchandrasuri
Publisher: Kalikal Sarvagya Shri Hemchandracharya Navam Janmashatabdi Smruti Sanskar Shikshannidhi Ahmedabad
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डिसेम्बर - २०१५
६७
१५६. देवकपाटण(-देवपुर-पाटण) बिराजमान श्रीविजयसेनसूरिजी पर आगराकोट
(-आग्रा)ना श्रीसङ्घ द्वारा प्रेषित, सं. १६६७, शहेनशाह जहांगीरना दरबारी चितारा उस्ताद शालिवाहने दोरेलां, बादशाह जहांगीरे पं. श्रीविवेकहर्षने १२ दिवसनी अहिंसा- फरमान सुपरत कर्यु ते घटनाना आंखे देखेला अहेवाल जेवां चित्रो सहित, राजस्थानी, गद्य, आदि - स्वस्ता श्रीचंतामणापारस्वजण प्रणार्मो श्रीदेवकापाटणा; सं. - मुनि श्रीपुण्यविजयजी, प्रत - लालभाई दलपतभाई विद्यामन्दिर, मूळ सचित्र पत्र, प्रका. - जैन साहित्य संशोधक - खण्ड १ - अङ्क - ४ (सं. - मुनि श्रीजिनविजयजी); Ancient Vijnaptipatras (by Hiranand Sastri, Baroda State Press, 1942); Studies in Indian Painting (by C.N. Mehta, 1926); 'अमारिघोषणानो दस्तावेज' (सं. - श्रीविजयशीलचन्द्रसूरिजी,
भद्रङ्करोदय शिक्षण ट्रस्ट - गोधरा, सं. २०५२). १५७. वीरमपुर(-वीरमगाम) बिराजमान श्रीविजयजिनेन्द्रसूरिजी पर मेदिनीपुर(
मेडता)ना श्रीसङ्घ वती पं. श्रीगुलालविजयजी → मुनि श्रीदीपविजयजी द्वारा लिखित, सं. १८६७, सचित्र, राजस्थानी, गद्य-पद्य, मङ्गल श्लोक बाद आदि - सारद मात मया करी प्रणमी सद्गुरु पाय; सं. - भंवरलाल नाहटा, प्रत - गुजराती तपागच्छसङ्घ ज्ञानभण्डार - कलकत्ता; प्रका. -
महावीर जैन विद्यालय सुवर्ण महोत्सव ग्रन्थ, पृ. ४९-६४. १५८. वगडी बिराजमान श्रीविजयप्रभसूरिजी पर उज्जयिनीना श्रीसङ्ग वती उपाध्याय
श्रीविनयविजयजी द्वारा लिखित, गुजराती, गद्य, आदि - स्वस्तिश्रीभवनं मनोज्ञवचनं त्रैलोक्यलोकावनम्; सं. - मुनि जिनविजयजी; प्रका. - जैन
साहित्य संशोधक - खण्ड ३ - अङ्क ३, पृ. २७७-२८१. १५९. गांदलीबन्दिर(-गांघली) बिराजमान श्रीविबुधविमलसूरिजी पर औरंगाबादना
श्रीसङ्घ द्वारा प्रेषित, सं. १८१०, गुजराती, गद्य-पद्य, आदि - स्वस्तिश्रीभवनं मनोज्ञवचनं त्रैलोक्यलोकावनम्; सं. - मुनि जिनविजयजी; प्रका. - जैन
साहित्य संशोधक - खण्ड ३ - अङ्क ४, पृ. ३२६-३३३. १६०. अमदावाद बिराजमान श्रीविजयप्रभसूरिजी पर सूरतना श्रीसङ्घ द्वारा प्रेषित,
सं. १७२४, गुजराती, गद्य-पद्य, मङ्गल श्लोक बाद आदि - लेख लिखई

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