Book Title: Anusandhan 2002 09 SrNo 21
Author(s): Shilchandrasuri
Publisher: Kalikal Sarvagya Shri Hemchandracharya Navam Janmashatabdi Smruti Sanskar Shikshannidhi Ahmedabad

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Page 41
________________ ३६ बीयं दंसणा (ण) वरणं नव पयडीउ व कमेण नायव्वा । पत्तेयं अयराणं कोडाकोडी य तीसा य ॥३॥ अनुसंधान - २१ वेयणीयं तह तीयं सायमसायं च हु दुन्नि पडणं । तीसं कोडाकोडी पयडि-ठिइ तीयंकम्मस्स ||४|| मोहणीयं पि चउत्थं अट्ठावीसं च होइ पयडीउ । मिच्छत्त- मीस - सम्मं कोडाकोडी य सत्तिरियं ॥५॥ सोलसविहा कसाया चत्तालीसं कोडाकोडीओ । हास-रय (ई) दस नेयं सेसा चत्तारि वीसा य ॥ ६ ॥ पुं- इत्थि - नपुंसवेया दस-पन्नरस-वीसं कोडाकोडी उ । पयडीय अट्ठवीसं पुण एवं भणियं समासेण ||७|| पंचम आउ चउव्वि (वि) हं नारय - सुर सागराण तित्तीसा । तिरिय- मणुआ तिपल्लिय-ठिइकालं चउविहा भणिया ||८|| छद्रं च नामकम्मं सयअहियं तिन्नि य पडियं (तिन्नि पयडियं) कहियं । नरय - तिरिगइ वीसं दस देवा पनरस मणुयगइ ॥ ९ ॥ एगिंदियजाई वीसं बि-ति- चउ अट्ठारसं च परिमाणं । पंचिदिजाइ वीसं उरलविउव्विय वीसं च ॥ १०॥ आहार तणू इक्कं तेजस-कम्मे य वीसगं होइ । अंगोवंग उरालिय विउव्वी (व्वि)य वीसं संधुणियं ॥ ११ ॥ आहार अंग इक्कि अह पनरस बंधणाणि वच्छामि । ओरालि (य) - ओरालिय ओरालिय-तेयबंधं तु ॥ १२ ॥ उल-कम्मणबंधण उरालिय-तेयस-कम्मण [बंधं] च । उच्छं वेउव्वि- वेडव्विय वेडव्विय-तेयसबंधं च ॥१३॥ विउव्वियकम्मबंधण विउव्वितेयसकम्मणं भणियं । अटु एस (सिं) ठिइकालं (लो) कोडाकोडी य वीसा य ||१४|| Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org

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