Book Title: Anantki Anugunj
Author(s): Pratap J Tolia
Publisher: Vardhaman Bharati International Foundation

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Page 47
________________ मैं मौन जगाने आया मैं मौन जगान े आया, रे भाई ! शांति जगान आया; जो कुछ तेरे पास पड़ा है, [उसे] देन - दिखाने आया, रे माई ! शांति..... छोड़ो इन शब्दों को छोड़ो, शोरों के नातों को तोड़ो, शब्द - शोर के पार बसा जो, उस से मिलान आया, रे भाई ! उस नीरव में शांति हस्ती, भरी है उसमें मौन की मस्ती; उस मस्ती से उठन े वाले, गान सुनाने आया, रे भाई ! शांति शांति मौन नीरव है, ध्यान नीरव है, प्रेम का भी संधान नीरव है, उस (परम ) 'नीरव' में, रव के स्पंदन, विलीन कराने आया, रे भाई ! शांति संत की अनुगूंज

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