Book Title: Agam 12 Uvavayaim Uvangsutt 01 Moolam
Author(s): Dipratnasagar, Deepratnasagar
Publisher: Agam Shrut Prakashan

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Page 18
________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra www.kobatirth.org सूक्तं- २० विसग्गे से तं संसारविउस्तग्गे से किं तं कम्मविउत्सग्गे कम्म- विउस्सग्गे अट्ठविहे पत्रत्ते तं जहानाणावरणिजकम्मविउस्सग्गे दरिसणावरणिजकम्मविउस्सग्गे वेयणीयकम्मविउस्सग्गे मोहणीयकम्मविउस्सगे आउयकम्मविउस्सग्गे गोयकम्मविउत्सग्गे अंतरायकम्मविउस्सग्गे से तं कम्मविउस्सग्गे से तं भावविउस्सग्गे से तं अभितरए तवे । २०/-20 (२१) तेणं कालेणं तेणं समएणं समणस्स भगवओ महावीरस्स बहवे अणगारा भगवंतोअप्पेगइया आचारधरा [अप्पेगइया सूयगडधरा अप्पेगइया ठाणधरा अप्पेगइया समयायधरा अप्पेगइया विवाहपत्तिधरा अप्पेगगइया नायाधम्मकहाधरा अप्पेगइया उवासगदसाधरा अप्पेगइया अंतगडदसाधरा अप्पेगइया अनुत्तरोववाइयदसाधरा अप्पेगइया पण्हाचागरणदसाधरा] अप्पेगइया विवागसुधरा अपेगइया वायंति अप्पेगइया पडिपुच्छंति अप्येगइया परियट्टंति अप्येगइया अनुप्पेहंति अप्पेगइया अक्खेवणीओ विक्खेवणीओ संवेयणीओ निव्वेवणीओ चउव्विहाओ कहाओ कहति अप्पेगड्या उड्जाणू अहोसिरा झाणकोडोवगया-संजमेणं तवसा अप्पाणं भावेमाणा चिहरति 12 3 Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir संसारभउव्विग्गा जम्मण- जर मरण-करण- गंभीर- दुक्ख पक्खुभिय-पउर-सलिलं सोजगंविओग-वीचि - चिंता-पसंग- पसरिय-वह-बंध -महल्ल- विउल- कल्लोल-कलण-विलविय -लोभकलकलेंत-वोलबहुलं अवमाणण- फेण-तिव्वस्त्रिंसण-पुलंपुलप्यभूय-रोगवेयण- परिभव- विणिवाय - फरुसधारणा - समावडिय - कढिणकम्मपत्थर-तरंग-रंगत- निच्चामधुमय- कोयपट्टे कसाय-पायालसंकुलं भवसयसहस्स-कलुसजल-संचयं पइभवं अपरिमियमहिच्छ कलुसमइवाउ- वेगउद्धम्पमाणदगरययंधकार-वरफेण-पउर - आसापिवास धवलं मोहमहावत्त- भोगभममाण- गुप्पमाणुच्छलंतपच्चोणियंतपाणिय- पमायचंडबहुदुट्ठसावय-समाहयुद्धयभाण-पदभार - घोरकंदि-यमहारव - रवंत - भेरवरचं अन्नाणभमंतमच्छ-परिहत्य - अणिहुतिदियमहामगर तुरिय-चरिय-खो- खुमाण-नच्चंतचवल - चंचल - चलंत धुम्मंत जल-समूहं अरइ-मय विसायसोग-मिच्छत्त- सेलसंकडं अणाइसं ताण-कम्मबंधणकिलेस चिक्खल सुदुत्तार अमर-नर- तिरिय-निरयगइ-गमण-कुडिलपरिवत्त-विउलबेलं चउरंतमहंतमणवयागं रुदं संसारसागरं भीमदरिसणिज्जं तरति धिइ धणिय-निष्पक्पेणं तुरियचवलं संबर- बेराग-तुंग- कूवय- सुसंपउत्तेणं नाण- सिय-विमलमूसिएणं सम्मत्त - विसुद्धलद्ध - निजामएणं धीरा गहिय-निज्ञ्जरण-जयण-उवओग-नाणदंसणविसुद्धवयभंड-मरियसारा जिणवरघयणोवदिट्ठमग्गेण अकुडिलेणं सिद्धि-महापट्टणाभिमुहा समणवरसत्थवाहा सुसुइ-सुसुंभाससुपण्ह - सासा गा गा एगरायं नगरे-नगरे पंचरायं दूइचंता जिइंदिया निष्पया गयभया सचित्ताचित्तमीसएसु दव्वेसु विरागयं गया संजया विरता मुत्ता लहुया निरवकंखा साहू निहुया चरति धम्मं 1291-21 (२२) तेणं कालेणं तेणं समएणं समणस्स भगवओ महावीरस्स बहवे असुरकुमारा देवा अंतियं पाउदभविस्या - काल-महानीलसरिस-नीलगुलिय- गवल - अयसिकुसुमप्पगासा वियसियसयवत्तमिव पत्तल निम्मल - ईसीसियरत्ततंब - नयणा गरुलायत उज्जु-तुंगणासा ओयविय-सिल-पवाल-बिंबफलसणिभाहरोडा पंडुर ससिसयल विमल निम्मल - संख - गोखीर - फेण-दगरयमुणालिया-धवलदंतसेढीहुयवह- निद्धंत धोय तत्त तवणिज्ज-रत्ततलतालु जीहा अंजण-धणकसिण-रुयग-रमणिज्ज- निद्धकेसा वामेगकुंडलधरा अद्दचंदणाणुलित्तगत ईसीसिलिंध-पप्फप्प - - १३ For Private And Personal Use Only

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