Book Title: Agam 12 Uvavayaim Uvangsutt 01 Moolam
Author(s): Dipratnasagar, Deepratnasagar
Publisher: Agam Shrut Prakashan

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Page 34
________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra www.kobatirth.org Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir सूतं-४१ पाणाइवायं पचक्खापो जावज्जीवाए [सव्यं मुसावायं पच्चरखापो जावञ्जीवाए सव्वं अदिन्नादाणं पचक्खामो जावञ्जीवाए सव्वं मेहुणं पच्चक्खामो जावजीवाए] सव्वं परिग्गहं पच्चक्खामो जावजीवाए सव्यं कोहं [मानं मायं लोहं पेजं दोसं कलहं अमक्खाणं पेसुन्नं परपरिवायं इरईमायामोसं] मिच्छादसणसल्लं अकरणिशं जोग पञ्चक्खामो जावजीवाए सव्वं असणं पाणं खाइमं साइमंचउब्विहं पि आहारं पञ्चक्खामोजावजीवाए जंपि य इमं सरीरं इटुं कंतं पियं मणुण्णं मणाणं पेशं वेसासियं संमयं बहुमयं अणुमयंभंडकरंडगसमाणंमाणं सीयं माणं उण्हं मा णं खुहा माणं पिकासा मा णं वाला माणंचोरा माणं दंसा मा णं मसगा मा णं वाइयपित्तिय-सिभिय-सण्णिवाइय विविहा रोगायंका परीसहोवसग्गा फुप्तंतु त्ति कटु एयंपिणं चरिमेहिं ऊसासनीसासेहिं योसिरामि त्ति कटु संलेहणा-झूसिया भत्तपाणपडियाइक्खिया पाओवगया कालं अणवकंखमाणा विहरंति तए णं ते परिव्वावा बहूई भत्ताई अणसणाए छेदेति छेदित्ता अश्लोइय-पडिक्कंता समाहिपता कालमासे कालं किच्चा बंभलोए कप्पे देवत्ताए उववण्णा [तहिं तेसिंगई तहिं तेसिंठिई तहिं तेसिं उववाए पन्नत्ते तेसिणंभंते देवाणं केवइयं कालं ठिई पत्नत्ता गोयमा दससागरोवमाई ठिई पन्नता अस्थि णं मंते तेसिं देवाणंइड्ढीइ वाजुईइ वाजसेइ वा वलेइ वा वीरिएइवा पुरिसककारपरकूकमेइ वा हंता अस्थि तेणं भंते देवा परलोगस आराहगा हंता अत्यिसेसंतं चेवा३९।-37 (५०) बहुजणे णं भंते अण्णमण्णस्स एक्पाइक्खइएवं भासइ एवं पत्रवेइ एवं पस्वेइ-एवं खलु अम्मडे परिव्वायए कंपिल्लपुरे नवरे घरसए आहारमाहरेइ घरसए वसहिं उयेइ से कहमेयं मंते एवं खलु गोयमा जंणं से बहुजणे अण्णमण्णस्स एवमाइक्खइएवं भासइ एवं पत्रवेइ एवंपल्वेइएवं खलु अप्पडे परिव्यायए कपिल्लपुरे [नयरे घरसए आहारमाहारेइ घरसए वसहिं उवेइ सच्चेणं एसपढे अहंपिणं गोयमा एचमाइक्खामि [एवं भासामि एवं पत्रवेमि] एवं पस्वेमि एवं खलु अम्मडे परिव्वायए [कंपिल्लपुरे नयरे घरसए आहारमाहरेइधरसए! वसहि उवेइ से केगडेणं मंते एवं वुच्चइअम्मडे परिव्वायए [कंपिल्लपुरे नयरे घरसएआहारपाहरेइ घरसए] वसहिं उवेइ गोयमा अम्मडस्सणं परिव्वायगस्स [पगइमइयाए पगइउदसंतयाए पगइपतणुकोहमाणमायालोहयाए मिउमद्दवंसपन्नयाए अल्लीणयाए वीणीययाए छटुंछडेणं अनिक्खितेणं तवोकम्मेणं उड्ढं बाहाओ पगिझियपगिझिय सूराभिमुहस्स आघावणभूमीए आयावेमाणस्स सुभेणं परिणामेणं पसत्येहिं अज्झवसाणेहिं लेसाहिं विसुन्झमाणीहि अण्णया कयाइ तदावरणिजाणं कमाणं खओवसपेणं ईहापूरमग्गण-गवेसणं करेमाणस्स वीरियलद्धीए येउब्बियलद्धीए ओहिनाणलद्धी समुप्पण्णा तए णं से अम्मडे परिव्यायए तीए वीरियलद्धीए वेउब्बियलद्धीए ओहिनाणलद्धीए सपुप्पण्णाए जणविम्हावणहेउं कंपिल्लपुरे नयरे घरसए[आहारमाहरेइ घरसए] वसहि उवेइ से तेणटेणं गोयमा एवं बुच्चइअम्पडे परिव्यावए कपिल्लपुरे नयरे घरसए[आहारमाहेरइ घरसए वसहिं उवेइ पहू णं भंते अम्मडे परिव्वायए देवाणुप्पियाणं अंतिय मुंडे भवित्ता अगाराओ अणगारियं पव्वइत्तए नो इणढे समढे गोयमा अम्मडेणं परिवायए समणोवासए अभिगयजीवाजीवे [उवलद्धपुत्रपावे आसव-संवर-निञ्जर-किरियाहिगरण-बंध-मोक्खकुसले असहेजदेवासुरणाग-सुवण्णजक्ष रक्खस-किन्नर-किंपुरिस-गरुल-गंधव्व-महोरगाइएहिं निर्गयाओ पावयणाओ अणइक्कमणिज्जे इणमो निग्गंथे पावयणे निस्संकिए निक्कंक्खिए निवितिगिच्छे लढे गहियढे पुच्छियडे अभिगवढे विणिच्छियट्टे अद्विमिंजपेमाणुरागरत्ते अयमाउसो निग्गंधे पावयणे अटे अयं परमट्टे सेसे For Private And Personal Use Only

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