Book Title: Aagam Manjusha 15 Uvangsuttam Mool 04 Pannavanaa
Author(s): Anandsagarsuri, Sagaranandsuri
Publisher: Deepratnasagar

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Page 80
________________ पमाणे पोग्गलचिणणा सरीरसंजोगो । दश्वपएसऽप्पबहुं सरीरओगाहणऽप्पबहुं ॥२१४ ॥ कति णं भंते! सरीरया पं०?, गो०! पंच सरीरया पं० २० ओरालिए वेउथिए आहारए श्री तेयए कम्मए, ओरालियसरीरे णं भंते ! कतिविधे पं०१, गो० पंचविधे पं० तं०-एगिदियओरालियसरीरे जाव पंचिंदिय०, एगिदियओरा० णं भंते! कतिविधे पं०?, गो० पंचविहे पं० तं०- पुढवीकाइएगि० जाव वणप्फइकाइय०, पुढवीकाइयए० णं भंते! कतिविधे पं०?, गो०! दुविहे पं० २०-सुहुमपुढवीकाइय० यबादरपुढवीकाइय० य, सुहुमपुढवीकाइयएगिक गंभंते! कतिविधे पं०?, गो०! दुविहे पं० सं०-पज्जत्तगसुहुमपुढवीकाइ० य अपज्जत्तगसुहुमपुढवी० य, वादरपुढवीकाइयावि एवं चेव, एवं जाव वणस्सइकाइयएगिदियओरालियत्ति, बेइंदियओरालियसरीरे णं भंते ! कतिविधे पं०१, गो०! दुविधे पं० सं०-पज्जत्तवेइंदि० य अपज्जत्तगवेईदिय० य, एवं तेईदिया चरिंदियावि, पंचिंदियओरालियसरीरे ण मंते! कतिविधे पं०?, गो०! दुविधे पं० त०-तिरिक्खजोणियपंचिंदियओरा० मणुस्सपंचिंदियओरा०, तिरिक्खजोणियपंचिं०णं भंते! कतिविधे पं०१, गो०! तिविघे ५० त०-जलयरतिरिक्खा पलयरतिरिक्ख० खयरति०, जलयरतिरि ओरालियसरीरेण भंते ! कतिविधे पं०?, गो०! दुविधे पं० त०-समुच्छिमजल० गम्भवतिजलयरपंचिं०, समुच्छिमजल मंते! कतिविधे पं०?, गो०! दुबिहे पं० तं०- पजत्तगसमुच्छिमपंचिं० अपजत्तगसमुच्छिम०, एवं गम्भवतिएवि, थलयरपंचिं०ओरालियसरीरे णं भंते! कतिविधे पं०१, गो०! दुविहे पं० तं०-चउप्पयथलयरतिरि० परिसप्पथलतिरि०, चउप्पयथलयरतिरि० णं भंते ! कतिविधे पं०?, गो०! दुविहे पं० सं०-समुच्छिमथलयरचउप्पयतिरि० गम्भवतियचउप्पयथल०, संमुच्छिमचउ० ! दविधे पं०२०-पज्जत्तसंमच्छिमचउ० अपजत्तसमुच्छिमचउप्पयथल०, एवं गम्भवतिएवि, परिसप्पथलयरतिरि० कतिविधे पं०?, गो०! दुबिहे पं०तं०-उरपरिसप्पथल भुयपरिसप्पथल० य, उरपरिसप्पथल० भंते ! कतिविधे पं०१, गो०! दुविहे पं००-समुच्छिमउर गम्भवतियउर०, संमुच्छिमे दुबिहे पं० त० अपज्जत्तसंमु०पजत्तसं. मुच्छिम०, एवं गम्भवतियउरपरिसप्प०, चउकतो भेओ, एवं भुयपरिसप्पावि समुच्छिमगम्भवक्कतिया पज्जत्ता अपज्जत्ता य, सहयरा दुविधा ५००-समुच्छिमा य गम्भवक्कतिया य, संमुच्छिमा दुविधा पं० त० पज्जत्ता अपज्जत्ता य, गम्भवक्कंतियाबि पज्जत्ता अपज्जत्ता य, मणूसपंचिंदियओरालियसरीरे णं भंते ! कतिविधे पं०१, गो०! दुबिहे पं००.स समुच्छिममणूस य गम्भवक्कंतियमणू०, गम्भवक्कैतियमणूस ओरालियसरीरे णं भंते ! कतिविधे पं०१, गो०! दुविहे पं० त०-पजत्तगगम्भवक्कंतियमणूस अपजत्तगगम्भ०मणूसपंचिं०।२६८। ओरालियसरीरेणं भेते ! किंसंठिते पं०?, गो०! णाणासंठाणसंठिते पं०, एगिदियओरा० किंसंठिते पं०?, गो० णाणासंठाणसंठिते पं०, पुढवीकाइय० किंसंठिते पं०?, गो० मसूरचंदसं०५०, एवं सुहुमपुढवीकाइयाणवि बादराणवि, एवं चेव पज्जत्तापज्जत्ताणवि, आउकाइयएगिदियओरा० भंते! किंसंठिते पं०१, गो०! थिचुकबिंदुसं० पं०, एवं सुहुमबादरपज्जत्तापज्जत्ताणवि, तेउ० किसंठिते पं०?, गो! सूईकलावसं०५०,एवं मुहुमवादरपज्जत्तापज्जत्ताणवि, वाउकाइयाणवि पडागासं०, एवं सुटुमचादरपज्जत्तापज्जत्ताणवि, वणप्फडकाइयार्ण णाणासं०५०, एवं सुहमवादरपज्जत्तापजत्ताणवि, बेइंदियओरा० मत! किंसंठिए पं०?, गो हुंडर्स०, एवं पज्जत्तापज्जत्ताणवि, एवं तेइंदियचउरिदियाण पंचिदियतिरिक्खजोणियओरा भंते ! किंसंठिए पं०१,गो! छविहे पं० तं०-समचउरंस जाब हुँडसठाणसंठितेवि, एवं पज्जत्तापजत्ताणवि, समुच्छिमतिरिक्व०किंसंठिए पं०१, गो०! हुंडर्स०५०, एवं पज्जत्तापज्जत्ताणवि, गम्भवतियतिरिक्ख भंते ! किंसंठिए पं०१, गो! छविहसंठाणसंठिए पं० तं०-समचाउरंससं० जाव हुंडसंठा०, एवं पज्जत्तापज्जत्ताणवि, एवमेते तिरिक्खजोणियाणं ओहियाणं णव आलावगा, जलयरपं० भंते! किंसंठिया पं०?, गो! छविहसंठाणे ५००-समचउरंसे जाव हुंडे,एवं पजत्तापजत्ताणवि, समुच्छिमजलयरा हुंडसंठाणसंठिता, एतेसिं चेव पज्जना अपजत्तगावि एवं थेव, गम्भवतियजलयरा छविहसंठाणसंठिता एवं पज्जत्तापज्जत्ताणवि, एवं थलयराणविणव सुत्ताणि, एवं चउप्पयथलयराणवि उरपरिसप्पथलयराणवि भुयपरिसप्पथलयराणवि, एवं सहयराणवि णव सुत्ताणि, नवरं सवत्य संमुच्छिमा हुंडसंठाणसंठिता भाणितवा, इयरे छसुवि, मणूसपंचिंदिय० णं भंते! किंसंठिए पं०?, गो! छविहसंठाणसंठिते ५०० समचाउरंसे जाव हुंडे, पजत्तापजत्ताणवि एवं चेव, गब्भवक्कंतियाणवि एवं चेव, पजत्तापजत्ताणवि एवं चेव, संमुच्छिमाणं पुच्छा, गो०! हुंडसंठाणसंठिता पं०।२६९। ओरालियसरीरस्स णं भंते ! केमहालिया सरीरोगाहणा पं०१,गोजह अंगुलस्स असंखेजतिभागं उको० सातिरेगं जोयणसहस्सं, एगिदियओरालि. यस्सवि एवं चेव जहा ओहियस्स, पुढवीकाइयएगिदियओरालियसरीरस्स णं भंते ! केमहालिया सरीरोगाहणा पं०?, गो०! जह० उ० अंगुलस्स असंखेजतिभागं, एवं अपजत्तयाणवि पज्जत्तयाणवि, एवं सुहुमाणं पज्जत्तापज्जत्ताणं, बादराणं पज्जत्तापज्जत्ताणवि, एवं एसो नवओ भेदो जहा पुढविक्काइयाणं तहा आउकाइयाणवि तेउकाइयाणवि बाउक्काइया - णवि, वणस्सइकाइयओरालियसरीरस्स णे भंते ! केमहालिया सरीरोगाहणा पं०१, गो० ज० अंगुलस्स असंखेजतिभागं उक्को सातिरेगं जोअणसहस्सं अपज्जत्तगाणं जह• उक्को० ७५१ प्रज्ञापना, पढ़-०२१ मुनि दीपरत्नसागर


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