Book Title: Vardhaman Tap Mahima Yane Shrichand Kevali Charitram Part 01
Author(s): Siddharshi Gani
Publisher: Vishva Shanti Prakashan
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________________ __ 6710 निस्पृही श्री 'श्रीचन्द्र' कहने लगा कि, "हे मित्र का तुम यह नहीं जानते हो कि हम पिताजी को पूछे बिना ही यहां आये हुए हैं, प्रतः हमें विलम्ब नहीं करना चाहिये / और शीघ्र ही घर पहुंच जाना चाहिये / " इतना कह रथ पर सवार हो कर सारथी को . भाट ने श्री 'श्रीचन्द्र' को पहचान कर सबके सामने उसका स्पष्ट वर्णन किया कि, "यह कुशस्थल के लक्ष्मीदत्त श्रेष्ठी का पुत्र श्री 'श्रीचन्द्र' है। आठ प्रियाओं का पति है / गुणंधर गुरु से इसने शिक्षा ग्रहण की है। इसके पास सुवेग रथ और पवनवेगी वायुवेग और महावेग घोड़ों की जोड़ी है। राजा प्रतापसिंह ने करणकोट्टपुर इसे भेंट में अर्पण किया हुआ है। तिलकराजा ने उचे स्वर से कहा कि, "हे सैनिकों ! जो कुमार जा रहा है, उसे वापिस लौटा लाओ।" अनेक सैनिक घोड़ों 'श्रीचन्द्र' के पास नहीं पहुंच सका / वह तो वायु के समान प्रतिवेग . से निकल गया। यह देख कर मन में अति आश्वर्य युक्त होकर राजा कहने लगा 'सब से दुष्कर कार्य श्री 'श्रीचन्द्र' ने किया है। अति कष्ट पूर्वक भी जो न छोड़ा जा सके वह श्री 'श्रीचन्द्र ने सणवार में त्याग कर दिया है।" सैनिक खाली हाथ वापिस लौटे / यह देख कर राजा बहुत दुःखी हुआ। कन्या तिलकमंजरी मूर्छित हो गई। शीत उपचार P.P. Ac. Gunratnasuri M.S. Jun Gun Aaradhak Trust