Book Title: Vardhaman Tap Mahima Yane Shrichand Kevali Charitram Part 01
Author(s): Siddharshi Gani
Publisher: Vishva Shanti Prakashan
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________________ * 24 .. इतिहास पुराण में कहा है अदिसा यह परम धर्म है / अहिसा यह परम तप है, अहिंमा परम ज्ञान है, पहिंसा परम सुख है अहिंसा परम दान है, अहिंसा परम दम है, अहिंगा परम यज्ञ है, अहिंमा परम शुभ है। जो महात्मा अहिंसा के उत्तम धर्म का प्रापरण करते हैं, वे महात्मा विष्णु लोक में जाते हैं / ............ नग्यडल. ग्रन्थ में लिखा है, सब अभक्ष्य त्यागने योग्य हैं / मद्यपान में मस्त लोग, प्रकार्य में मस्त, हमेशा उन्हें न शौच, न तप, न जान, न बुद्धिन पुरषार्थ / मद्यपान से मति भ्रष्ट होती है / उनको द्या, ध्यान, धर्म और सत् क्रिया तो होती नहीं / मद्यमान करने वाले को क्रोध, मान, लोभ, मोह उत्पन्न हो जाता है। किसी पर किसी समय राग तो किसी समय द्वीप होता है। गंदेवचन निकलने लगते हैं / मनुष्यं मद्य पोकर मांस की इच्छा रखता है। उसके लिये जीव को मारता हैं / वांद में जब इच्छा बढ़ जाती है तो जीवों के समुदाय "मारने में भी हिचकिचाहट'नहीं करता / मद्य, मांस, और छाछ से बाहर निकले हुये मक्खन में अनेक सूक्ष्म जीवों की राशी उत्पन्न हो 'जाती है .. . .. .. . : : 'आगम में भी इन वस्तुओं में अनंत जीव उत्पन्न हो जाते हैं ऐसा कहा है। महाभारत के मास अधिकार में कहा है कि मांस हिंसा वर्धक है मांस दुख-वर्धक और दुख को उत्पन्न करने वाला है / इसलिये मांस भक्षण नहीं करना चाहिये / तिल और सरसों जितना भी मांस P.P. Ac. Gunratnasuri M.S. Jun Gun Aaradhak Trust