Book Title: Vardhaman Tap Mahima Yane Shrichand Kevali Charitram Part 01
Author(s): Siddharshi Gani
Publisher: Vishva Shanti Prakashan

View full book text
Previous | Next

Page 256
________________ . 1350 बजाने वाले, 42 हजार छत्र,चामर को धारण कराने वाले पुरुष,४२ हजार महावत शोभते थे, हरि तारक आदि भाट, वीणारव आदि गायक और दूसरे व वियों से स्तुति करवाते हुये श्रीचन्द्र सुशोभित होते थे। सर्व देशों में सब जातियों में लोगों को इच्छित दान देकर, सारी पृथ्वी को अऋणी किया। सर्व निमित्रों और सर्व शास्त्रों के प्रादि में श्रीचन्द्र संवत्सर अंकित कराया / दानशालायें, प्याऊ, मठ, मन्दिर प्रादि प्रत्येक सोलह 2 हजार कराये / सत्तर वार सब जीवों को बोधिवीज देने वाली मात पिता सहित महायात्रायें की। प्रतिदिन श्री जिन पूजा, आवश्यक क्रिया और मात-पिता की भक्ति, गुरु महाराज की चरण स्थापना को वन्दन सन किया को करते थे / सारे देशों में अमारी की घोषणा की और अहिंसा को फैलाया / गांव-गांव में, गिरि-गिरि पर श्री जिन मन्दिर, जिन बिंबों की स्थापना करके पृथ्वी को श्री जिनेश्वर देव से मंडित की। श्री जिन आज्ञा के पालक ऐसे वे, सात क्षेत्रों में धन देते हुये, चार पर्वो में कुव्या . पार का निषेध करते हुये, श्री जिन वचन तथा उनके कहे हुये तत्वों में श्रद्धा रखते हुये राज्य पर शासन कर रहे थे / मानन्द पूर्वक बहुत समय व्यतीत हो गया / मुख्य तीन धर्म, अर्थ और काम को भोगते हुये चन्द्र कला की कुक्षि से चन्द्र स्वपन से P.P. Ac. Gunratnasuri M.S. Jun Gun Aaradhak Trust

Loading...

Page Navigation
1 ... 254 255 256 257 258 259 260 261 262 263 264 265