Book Title: Vardhaman Tap Mahima Yane Shrichand Kevali Charitram Part 01
Author(s): Siddharshi Gani
Publisher: Vishva Shanti Prakashan

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Page 250
________________ 16 126 पर व्यतीत की। वहां वह प्रकाशित रत्नों को देखकर उन्हें लेकर शिर्ष नगर में आया / वहां घातुवादीयों ने घोखे से उससे रत्न छीन लिये जिससे वह अति चिन्ता में पड़ गया। उधर जिनशेखर समाधि पूर्वक मर कर आठवें कल्प में देव रुप उत्पन्न हुआ। _ 'सुलस ने एक के बाद एक प्रती हुयी आपत्तियों से घबरा कर काली च उदश को शमशान में जाकर प्रापघात करने की तैयारी की, उसी समय पुण्ययोग से जिनशेखर का ध्यान सुजस की तरफ पाया, उसने तत्क्षण वहां प्राकर सुलस को बचाकर, अपनी हकीकत कही। प्रापघात के लिये ठपका देखकर उसे बहुत धन सहित अमरपुरी में छोड़ा और कहा कि जब जरुरत पड़े मुझे याद करना / ऐसा कहकर देव अन्तरधान हो गया / राजा को भेंटना देकर सुलस घर भाकर सगे सम्बन्धियों से मिलता है। कामपताका को अपने घर लाकर उसके साथ और सुभद्रा के साथ संसार सुख भोगता है / विलास को भोगते हुये धन खतम हो गया तब वह जिनशेखर देव को याद करता है जिससे देव कोड़ द्रव्य की वृष्टि कर देव अंतरधान हो गया। एक समय सुलस ने गुरु महाराज से परिग्रह परिमाण का नियम लिया। एक दिन नगर बाहर शरीर चिन्ता के लिये वाहर गया वहां उसने धन देखा, नियम होने के कारण उसने वह धन नहीं लिया / ये समाचार जब राजा को मिले तो राजा ने प्रेम पूर्वक उसे राज्य का खजानची बनाया / कई वर्ष बीत जाने पर एक ज्ञानी गुरु महाराज पधारे / उनकी P.P. Ac. Gunratnasuri M.S. Jun Gun Aaradhak Trust

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