Book Title: Vardhaman Tap Mahima Yane Shrichand Kevali Charitram Part 01
Author(s): Siddharshi Gani
Publisher: Vishva Shanti Prakashan
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________________ .1021 इतने में तो गुणचन्द्र ने वंदन करके कहा कि, 'हे पूज्य ! यह पद्मिनी चन्द्रकला प्रापश्री की पुत्र वधु है।" विवाह आदि की सवं हकीकत कह कर चन्द्रकला से कहा कि "आपके पति यहीं हैं। अपने ससुर को प्रणाम करो।" महाआश्चर्य म युक्त श्रेष्ठी ने, सखियों से घिरी हुई पद्मिनी को देखा / अनि उत्कंठा से सर्व हकीकत पत्नी से कही। र गुणचन्द्र ने कहा कि, हे पूज्य ! इन रथों, अश्वों प्रादि को कहां रखना है ?" लक्ष्मीदत्त ने कहा कि "भाग्यशाली श्रीचन्द्र से पूछो, से वह कहे वैसे करो" झरोखे में विराजमान श्रीचन्द्र को विनंति की। श्रीचन्द्र ने सैनिकों प्रादि को आदर पूर्वक बुलाक़र यथास्थान जाने की माज्ञा दी। रथों और प्रश्वों प्रादि को श्रीपुर में रखा। श्रेष्ठी ने श्रीचन्द्र से कहा, "हे वत्स ! यह सब उत्कृष्ठ कार्य तो हू'ने किये परन्तु हमारी आज्ञा भी नहीं ली ? तुम्हारी धीरता, निरभिमानता प्रादि अत्यंत आश्चर्यकारी है। हमें प्रवेश महोत्सव करने का भी हर्ष प्राप्त नहीं हुआ।" - सातवीं मंजिल में श्रीचन्द्र के निवास में पद्मिनी सखियों से मुक्त पायी। पति के साप वार्तालाप विनोद प्रादि को करती सुख पूर्वक रहने लगी। श्रेष्ठी के घर मन्त्री, श्रेष्ठी आदि आनन्द से आये / महान महोत्सव, गीत दान प्रादि से घर प्रति शोभा को प्राप्त हुआ। दहेज प्रादि देख कर सब को बहुत मानन्द हुआ। . .. P.P. Ac. Gunratnasuri M.S. Jun Gun Aaradhak Trust