Book Title: Vardhaman Tap Mahima Yane Shrichand Kevali Charitram Part 01
Author(s): Siddharshi Gani
Publisher: Vishva Shanti Prakashan
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________________ 4. 42 90 स्वस्त्रो के भय स मुझे इस महल में रखा है। प्राज पाचवां दिन! मैं रुदन करती थी जिससे वह बोला कि रुदन क्या करती है ? में वताठय पर्वत पर रहने वाला रत्नचूड़ नामक विद्याधर है। अभी हमारा गोत्र के ही एक राजा ने मेरा मरिणभषण नगर अपने कब्जे में कर लिया है जिसमे मैं अपने परिवार सहित बाहिर रहता हूं। एक दिन पृथ्वी पर घूमते हुये मैं कुशस्थन गया। वहां उद्यान में अश्वों, रथा मोर हाथियों से युक्त विशाल सेना को देखा। ___वहां एक सुवर्ण के पलंग पर पुष्पों से क्रीड़ा करती हुयी, सखियों से युक्त, सुसराल से पिता के घर जाती हुई पद्मिनी को देख कर मुझे अतिशय प्रेम उत्पन्न हुआ। मनोहर सुभंग अंग वाली उसको हरण करने के लिये एक दिन मैं वहां अदृश्य पण में रहा। मैंने अपने दो रुप / करने का यत्न किया। परन्तु पद्मिनी पति से रक्षित थी और स्वशान / की रक्षा वाली थी, जिस कारण मेरे दो रुप नहीं हुये / बाद में उसा के समान रुप वाली स्त्री की मैं खोज में था। पृथ्वी पर निरीक्षण ! करते हुये मिली है अब मैं तुझ से शादी करुंगा। ऐसा कह कर सफेद मंजन डाल कर मुझे बंदरी बना दिया, तीसरे दिन वापिस माकर श्याम भजन डाल कर सुन्दरी बनाकर कहने लगा, हे सुन्दरी लह ग्रहण करो, मैं लग्न देखकर पाया हूँ। 'गुरुवार के मध्यान्ह समय शुभ लग्न है / ये सारी सामग्री दूं रख, में विद्या साधने जाता है बुधवार की रात को या गुरुवार प्रातकाल में में बाउंगा। मैंने कहा कि, 'हे विद्याधर ! मूर्ख है ? या जर P.P. Ac. Gunratnasuri M.S. Jun Gun Aaradhak Trust