Book Title: Vaidyasara
Author(s): Satyandhar Jain
Publisher: Jain Siddhant Bhavan

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Page 57
________________ वैद्य-सार टीका-सोंठ, काली मिर्च, पीपल, समुद्र नमक, काला नमक, सेंधा नमक, साम्हर नमक, कच नमक, सौंफ, स्याह जोरा, सफेद जीरा, जवाखार, सजी बार, टंकण क्षार, शुद्ध गंधक, शुद्ध पारा, अभ्रक भस्म ये सब बराबर बराबर लेकर प्रदरख के रस के साथ एक दिन भर मर्दन कर इसकी एक एक रत्ती प्रमाण गोली बनाये। यह वीरभद्र नामक रस एक माशे की मात्रा से चित्रक तथा अदरख के रस के साथ सेवन करने से सब प्रकार के सन्निपातों को दूर करता है। इसका दूध-भात पथ्य है। ५४-सन्निपाते सन्निपातांजनम् निष्कजैपालबीजानि दशनिष्काणि पिप्पली । मरिवं पारदं चैव निष्कमेकं विमर्दयेत् ॥१॥ सप्ताहं भावयेत्सम्यक् चूर्ण जंबीरवारिणा । सन्निपातहरं चैतत् अंजनं परमं हितं ॥२॥ टीका-३ माशा जमालगोटा, २॥ तोला पीपल, ३ माशा कालोमोर्च, ३ माशा पारा इन सबको जंबीरी नीबू के रस में घोंट कर अञ्जन बनावे। इस अञ्जन को सन्निपात-दोष में भांख में प्रांजने से सन्निपात दूर होता है। ५५--शीतज्वरे शीतभंजी रसः पारदं रसकं तालं शिखितुत्थं च टंकणं । गंधकं च समान्येतान्येकीकृत्य विमर्दयेत् ॥१॥ दिनद्वयं कारवल्लीरसेनाथ विलेपयेत्।। ताम्रपानोदरे तञ्च भांडमध्येऽप्यधोमुखं ॥२॥ निक्षिप्य रुन्या संशोय बालुकाभिः प्रपूरयेत् । तत्पृष्ठे निक्षिपेत् ब्रीहीन चुल्ल्यां मंदाग्निना पचेत् ॥३॥ . स्फुटितं ब्रीहिणं यावत् तावत्सिद्धो भवेद्रसः । स्वांगशीतलमादाय प्रदद्याद्वांतजे ज्वरे ॥४॥ शीतभंजी रसो नाना सर्वज्वरकुलांतकः । ___टीका-शुद्ध पारा, शुद्ध खपरिया, शुद्ध तवकिया हरताल, शुद्ध तृतिया, सुहागा, गंधक इन सब को समान भाग लेकर २ दिन तक करेले के रस में घोंट कर शुद्ध तामे के किसो Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com

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