Book Title: Samudrik Shastranu Gujarati Bhashantar
Author(s): Shravak Bhimsinh Manek
Publisher: Shravak Bhimsinh Manek

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Page 220
________________ (१७) कने शणगारीने कर्वा जे जेने ए राजा करी थापे तेने राजगादीए बेसामवो; केमके तेम कर्याथी पित्राश गोत्रा जे होय ते पागल उपर कांश वांधो करी शके नहीं. हवे हाथी ने घोमो ए बे बहार नीकलीने जे वामीमां मूलदेव सूतो ते वामीमां श्रावी हाथीए गललाट करी मूलदेवना मस्तक उपर कलश ढोल्यो भने घोडे हणदणाट कर्यो. पनी हाथी तेने शुढथी उपाडी पोतानी पीठ उपर बेसामीने शहरमां लश् श्राव्यो भने लोकोए तेने राजपाटे थाप्यो; माटे सारं स्वप्न दी होय तो उत्तम माह्या पुरुष आगल कहे, पण मूर्ख श्रागल नज कहे; कारणके तेम करवाश्री पुःख थाय जे. ते उपर एक वणिकस्त्रीनुं दृष्टांत कहे . ___ को वणिकस्त्री 'में समुपान कर्यु' ए, स्वप्न जोश जागी ग.पनी प्रनाते ते स्वप्ननुं फल पूबवा माटे गहुली लश् गुरु पासे जवा लागी.रस्तामा एक सहीयर मली. तेणे पूज्युं के "ब्देन! गहुली लश् क्यां जाव डो ?" ते वारे ते स्त्रीए उत्तर प्राप्यो नहीं एटले सहीयरे ग्रहथी पूब्युं, तेथी तेणीए कह्यु के " में स्वप्नमां समुनपान कर्यु डे तेनुं फल पूबवा गुरु पासे जाउं Jain Educationa International For Personal and Private Use Only www.jainelibrary.org

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