Book Title: Prastar Ratnavali
Author(s): Ratnachandra Swami
Publisher: Agarchand Bhairodan Sethiya Jain Granthalay
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२१२
छ संयोगीना.
१६६०००००-३६ ६६६०००००-२१६ ०००००६६६-१२०९६
१२०९६
११११११०० १११११६००-६ ११११६६००-३६ १११६६६००-२१६ ११६६६६००-१२९६ १६६६६६००-७७७६ ६६६६६६००-४६६५६ ००६६६६६६-१३०६३६८
चउक संयोगीना.
११११००००
-
१३०६३६८
१९६६००००-३६
१६६६००००-२१६ । ६६६६००००-१२९६
००००६६६६-९०७२०
९०७२० .
सात संयोगीनां.
पंच संयोगीना.
१११११००० ११११६०००-६ १११६६०००--३६ ११६६६०००--२१६ १६६६६०००-१२९६ ६६६६६०००-७७७६ ०००६६६६६-४३५४५६
१११११११० ११११११६०-६ १११११६६०-३६ ११११६६६०-२१६ १११६६६६०-१२९६ ११६६६६६०-७७७६ १६६६६६६०-४६६५६ ६६६६६६६०--२७९९३६ ०६६६६६६६-२२३९४८८ .
२२३९४८८
४३५४५६
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