Book Title: Prastar Ratnavali
Author(s): Ratnachandra Swami
Publisher: Agarchand Bhairodan Sethiya Jain Granthalay

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Page 260
________________ २४२ प्रकरण २ जु-प्रस्तार लखवानी रीत. जेटला पदनी अनुपूर्वीना प्रस्तार लखवा होय तेटला अंको अनुक्रमे पहेला प्रस्तारमा लखी जवा. पछी छेल्ला बे अंको कायम राखी आगलना अंकानुं परिवर्तन करवू. ते एवी रीते के लघु अंक आगल मुकवा अने गुरु अंक पाछल मुकवा. प्रथम लघु अंकोर्नु परिवर्तन करी पछी गुरु अंकनुं करवू. एम अंकोनुं परिवर्तन थई रहे त्यारे ते कोष्टक पूर्ण करी,कायमना बे अंकोमां एक दशको घटाडी पूर्ववत् वीजु कोष्ठक पूर्ण करवं. एटलं ध्यानमा राखq के एक प्रस्तारमा एने ए वे अंक न आवे. एम करतां करतां ज्यारे प्रथम प्रस्तारनो पुरेपुरो व्युत्क्रम थई जाय त्यारे ते प्रस्तारनी समाप्ति थशे. उदाहरण तरीके त्रणथी मांडी पांच पदनी अनुपूर्वांना प्रस्तार आंहि लखवामां आवे छे. त्रण पदनी अनुपूर्वीना प्रस्तार ६. rom Www १३२ २ ३ १ ३ २१

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