Book Title: Pradyumna Charit
Author(s): Sadharu Kavi, Chainsukhdas Nyayatirth
Publisher: Kesharlal Bakshi Jaipur

View full book text
Previous | Next

Page 234
________________ पंचमाल - २६४, ५७१ कंचरणमाला - १२६, १३३, १३४ -५१४ कछुक- १११ कस-३४८ कजल -- ३० कठिया - ३६८, ३७५ कहा- २३४ कठीया - ३६७ कठाइ -- ४३५, ४४६, ४४७ काख उराउ -- १६१ करणय--२६. ३११, ३६६ करणयमाल – १३५, २४१, २४५, २४६, २५०, ५४८ करण्यक - - १६५ करावी– ३४५ कशिक- ६३ करणौ--३३४ कत- १०८, २३०, ३६२ कतहुती--१ कथंतर--११७, ४३३, ५६.३ कथंत--४१३, ६६१ ( २३२ ) i कथा - ११, १३६, १६३, ४५३, ६५८ कन्ह-- ५०, ५७२, ५७५६०६ कन्ह-- ६२, ६३, ६६,७ कनउ - - ६०३ कमक-- ३७४, ५०६, ४६.१ कनकषालु ----३८५ कनकदंड -- २३, ५२ कनकमाल -- २३, २४६, २५१, २६३, २७७ ४७४ ६८२ कनय -- ५८२ कनयमाल -- २३० कन्या --२२३, ३०७, ६४६, ६५४ कनवजो—- ५.७६ -- ६८४ कंद — ६६८ केंद्र -- २१६, २४३, २६१, ४१८, ५६०, ५६२, ५६३, ६३५, ६३७, ६६.२ कंद्र - - ५.३०, ६३७ कंदलु -- ६८५ कषि-- २१३ कपट -- ६७ कंपइ -- ५०२. कंपत -- ३७५ कंपिउ ६७, २६५, ६४३ कमरण --- ६२६ कमणु-- २७६, २८४ कम्मु-२७ कमल -- ३ कमंडल - २५, ३१. १४६ कमंडलु -- ३६०, ३६१. ३६४, ३६५ कम्मड्डु– ६६७ कम्वरण--४२३ कम्बणु-- १४४, २२६, ३८४, ५२२, ५६८ ६७३ ६८ ६६० कयउ–४३० कपड– २०८, २३३ कयय – २१२ कर- ३, ५, ३३, ६३, ७०, ७२, ७६, ७६, १०३, १६१, २११, २३४, २३५, ३५३, ३६०, ३६५, ३८३, ४१९, ४५५, ४६६, ४४, ४७६,४७६, ४=६, ५३३, ५३६, ५४०, ७०१

Loading...

Page Navigation
1 ... 232 233 234 235 236 237 238 239 240 241 242 243 244 245 246 247 248 249 250 251 252 253 254 255 256 257 258 259 260 261 262 263 264 265 266 267 268 269 270 271 272 273 274 275 276 277 278 279 280 281 282 283 284 285 286 287 288 289 290 291 292 293 294 295 296 297 298 299 300 301 302 303 304 305 306 307 308