Book Title: Pahuda Doha
Author(s): Hiralal Jain
Publisher: Balatkaragana Jain Publication Society

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Page 150
________________ पाहुड-दोहा सिस्सिणी-शिष्यानी १७४. सिह - सह १२७. सिह - सह ६४,११०,१६८, सिंग-भंग ७०. सीलवण-शील+ वन १५६. सीस-शिष्य २७. सीस-शीप १७७. सु-सः ६८. सुख-सुप्न १८२. सुह-श्रुति ९८,१०३. सुक-इ-गुप्यति ९७. सुक्ख-सुख १०,११,२४, आदि. सुक्खाडा-सुरा+क+डा. १०६. सुक्खटा-सुख + मा १८९. सगुरुवडा-सु+गुरु+क+ढा सुब्ब- "इ-स्वपिति २०६. सुह - सुख २,३,४ आदि. नुह-शुग ७२,१४२. सुंधुकी- संक्षित, प्रदीप्त ८५. (सन्धुप-प्रदीप, हेम ४, १५२.) सूई-सूची २१३. सूर - शूर २८,३२. सूर- सूर्य ७५. सेव-इ-सेवते १९४; वाइ-सेवते १३१; हि-रोपसे १२०, २०५; °वंत-सेवमान २००० सेवड-वेताम्बर ३२. सेविभ- सेवित २०. सेस-रोग (शर) ३१. सो- सः १६,२३ आदि तम् ४६,१६०, सोह-सोऽपि ११७,१७५. सोक्ख-सौदय ६३,१३३,२१३. सोव- वेद-स्वपिति ४६ उ-स्वपितु १४४. सास-शोप २. सासण-शोषण १६. मुघण-मु+घन १४८, मुणह-यन् १९५. सुण्ण - शुन्य १३१,२१२, आदि, सुद्ध-शुद्ध ६,३५,१६२. सुपसिह - मप्रसिद्ध १०८. सुमर - 'दि-स्मरति १०३. सुमिट्ट- मुभिट १८. सुम्म-द-श्रूयते १८८. सरतम- (FEAT) १५२. सयेय ~°4:1+ बेनि १६५. - अहम २६,३१,३२,५१, १७४.

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