Book Title: Lonkashahka Sankshipta Parichay
Author(s): Punamchandra, Ratanlal Doshi
Publisher: Punamchandra, Ratanlal Doshi

View full book text
Previous | Next

Page 233
________________ ( 197) तैयारियां करनी पड़ती है। यद्यपि जैन समाज की मूर्ति पूजा में इस प्रकार की हिंसा नहीं होती, तथापिछहोंकाया केजीवों का याने एकेन्द्रिय से पंचेन्द्रिय तकके असंख्यात जीवों का घमासान तो हो ही जाता है, और धर्मान्धता के चलते स. मय 2 पर एकान्त निन्दनीय ऐसी मानव हत्या, अरे अपने भाई की हत्या भी हो जाती है, जिसके लिये केसरिया तीर्थ हत्याकाण्ड का काला कलंक प्रसिद्ध ही है / ऐसी अनर्थ एवं अहित की मूल, पाखण्ड की प्रचारक व अन्धविश्वास की जननी इस मूर्ति पूजा को समझदार लोग कभी उपादेय नहीं कह सकते।

Loading...

Page Navigation
1 ... 231 232 233 234 235 236 237 238 239 240 241 242 243 244 245 246 247 248