Book Title: Lonkashahka Sankshipta Parichay
Author(s): Punamchandra, Ratanlal Doshi
Publisher: Punamchandra, Ratanlal Doshi

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Page 238
________________ (202) : अन्त में श्री जिनवाणी से विपरीत कुछ भी शब्द वाक्य मा अर्थ लिखा गया हो तो मिथ्या दुष्कृत देता हुआ, भागमा बहुश्रुतों से नम्र विनती करता हूं कि वे कृपया भूल को समझा देने का कष्ट स्वीकार करें। // सिद्धा सिद्धिं मम दिसंतु // + डात 61 MERA RE STATERNORA CASTHAILDRILLERRENERASNA कामक HIRANA RECOMH

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