Book Title: Lonkashahka Sankshipta Parichay
Author(s): Punamchandra, Ratanlal Doshi
Publisher: Punamchandra, Ratanlal Doshi

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Page 245
________________ (5) पं०, अशुद्ध शुद्ध था थी श्रादि कि से प्रशंषा MNAWow u1 : oran चरेण साहणो पडिल भई भोजनालय सुपक्ति प्रादि का कि प्रभु से प्रशंसा चेरेण साहुणो पडिलब्भई (भोजनालय) सुपवित्त 'उर्द्ध पाठान्त ऊर्ध्व. पाठान्तर सूत्र सूत्र मूर्ति मच्छीमारों सत्र मूति " कोई मच्छीमारा काई जिन के नियुक्ति जिनके नियुक्ति .. सवज्ञ देखन - प्रथ की सर्वश देखने ग्रंथ

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