Book Title: Lonkashahka Sankshipta Parichay
Author(s): Punamchandra, Ratanlal Doshi
Publisher: Punamchandra, Ratanlal Doshi

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Page 244
________________ ( 4 ) 121 122 124 127 121 131 136 138 142 on Gendincome mona अशुद्ध अनुदन . अनुमोदन कत्तव्य कर्तव्य पजा पूजा मूर्तियों में मूर्तिये चित्र चित्रता दया हुई ? दया कैसे हुई ? महिमा महिया अंतकृशांग अंतकृद्दशांग साधु त्यागी त्यागी साधु हिसा , हिंसा बचना उसको उसको बचना यही . यह श्रलपा अल्पा अनुचित् अनुचित মায प्राण दोषी नहीं जानेंगे जानेंगे ময় अंश मूलास्य मूलाशय संग संघ वर्त्य वा अाजकल अाजकल के राजा राजा के . (ोषी 143 144 147

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