Book Title: Lonkashahka Sankshipta Parichay
Author(s): Punamchandra, Ratanlal Doshi
Publisher: Punamchandra, Ratanlal Doshi

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Page 242
________________ 60 शीर्षक (2) अशुद्ध तुगिया ऐसा हैं अर्थ है पठन शुद्ध तुगिया ऐसा किया है अनर्थ है पालन ध 51 52 MEW महिता माहता थुबं . थुभं महाकर महाक्रूर स्तनो , . स्ततो ओर श्रोट __ मूर्ति में मूर्तिये को मात्र ही कहते मात्र कहने को ही 17. उनको उनके 22 . मूति मूर्ति निर्गतायुक्तिर्याः निर्गतायुक्तिर्यस्याः यह ग्रंथों प्रागयाशय भागमाशय सामायिय सामायिक प्रतित प्रतीत विपयसि विपर्यय और प्रार्याश्चत 0 आचार्य देवरक्त आचार्य देव रक्त नीत पुनीत ... श्री ग्रंथों - 6

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