Book Title: Kuvalaymala Part 02
Author(s): Chandraguptasuri
Publisher: Anekant Prakashan Jain Religious Trust

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Page 14
________________ (१८०) 1 कम्म-कलंक-विमुक्का सिद्धि-पुरं जेण पावेह ।। तओ पणया सव्वे वि वासवप्पमुहा देव-दाणव-गणा भणिउं च पयत्ता । 'अहो, 3 भगवया कहिया जीवादओ पयत्था । साहिओ जीवो, परूवियाई जीव-धम्माइं । पण्णवियं बंध-णिज्जरा-मोक्ख-भावं' ति । 5 (१८०) एत्थंतरम्मि कहतरं जाणिऊण विरइयंजलिउडेण पुच्छिओ भगवया गणहर-देवेण धम्म-जिणवरो । ‘भगवं, इमीए स-सुरासुर-णर-तिरिय-सय7 सहस्स-संकुलाए परिसाए को पढमं कम्मक्खयं काऊण सिद्धि-वसहिं पाविहइ' त्ति । भगवया भणियं । ‘देवाणुप्पिया, 9 एसो जो तुह पासेण मूसओ एइ धूसरच्छाओ । संभरिय-पुव्व-जम्मो संविग्गो णिब्भर-पयारो ।। 11 मह दसण-परितुट्ठो आणंद-भरंत-बाह-णयणिल्लो । तड्डविय-कण्ण-जुयलो रोमंचुच्चइय-सव्वंगो ।। 13 अम्हाणं सव्वाण वि पढमं चिय एस पाव-रय-मुक्को । पाविहइ सिद्धि-वसहिं अक्खय-सोक्खं अणाबाहं ।।' 15 एवं च भगवया भणिय-मेत्ते सयल-णरिंद-वंद्र-तियसिंद-दणुवइ-पमुहस्स __तियस-वलिय-वलंत-कोउय-रहस-वस-वियसमाणाई णिवडियाइं रण्णुदुरस्स 17 उवरि दिट्ठि-माला-सहस्साई । सो य आगंतूण भत्ति-भर-णिब्भरो भगवओ पायवीढ-संसिओ महियल-णिमिउत्तमंगो किं किं पि णिय-भासाए भाणिउं 19 पयत्तो । भणियं च तियस-णाहेण । ‘भगवं, महंतं मह कोऊहलं जं एस सव्वाहम-तुच्छ-जाईओ कोमल-वालुया-थली-बिल-णिवास-दुल्ललिओ 21 रण्णुदुरो सव्वाणं चेय अम्हाणं पढमं सिद्धि-पुरि पाविहिइ त्ति । कहं वा इमिणा ___ थोव-कम्मेण होइऊण एसा खुद्द-जाई पाविय' त्ति । 1) J सिद्धिपुरिं, P पाविहिति for पावेह. 2) P adds या before सव्वे, P देवादाणव, P om. च. 3) J जीवातिओ P जीवादयो. 4) P मोक्खो भावं. 5) P विरइ अंजलिणा. 7) P पाविहित्ति. 8) J देवाणुपिया. 9) P एय for एइ, Jom. धूसरच्छाओ. 11) P भणंतबाहु. 13) P पढमचिय. 14) P पाविहिसि, J सिद्धिवसई, P सोक्खो अणाबाहिं. 15) J वंद for वंद्र, J प्पमुहस्स. 16) P ति for तियस, P वियसमणाई, P रन्नंदुरस्स. 17) P दिट्ठी. 18) P पायपीढं, P महियलनिउत्त०, P om. one किं, P नियय. 19) P कोउहल्लं. 20) P जाइओ, P थलिनिवास. 21) P रणदुरो, P inter. अम्हाणं & चेय, P सिद्धिफलं पुरिं, J पाविहि त्ति. 22) P थोय for थोव, P होइऊणा, P खुड्ड, जाई.

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