Book Title: Kumbhojgiri Jain Shwetambar Tirth Shatabdi Mahotsava Granth
Author(s): Kubhojgiri Tirth Committee Kolhapur
Publisher: Kumbhojgiri Tirth Committee Kolhapur

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Page 33
________________ 4 .. प्राचीन तीर्थ ओसीयाजी ( राजस्थान ) । यह मदिर बहुत पुराना अर्थात् भगवान महावीर के निर्वाण के ७० वर्ष पश्चात् श्री रत्नप्रभसूरि द्वारा प्रतिष्ठा कराया हुवा है। स्तभ और तोरणको कोरणी भाग्य है ।

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