Book Title: Karmvipak athwa Jambu Prucchano Ras
Author(s): Shravak Bhimsinh Manek
Publisher: Shravak Bhimsinh Manek

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Page 36
________________ (३५) खद बार ॥ तव गोयम मन चिंतवे, जीवितनो एसोर ॥जे कोई आपणथकी, कीजे पर उपकार ॥४॥ गोयम हियडे जाणतो, आणी पर नपकार ॥ सजा सहुको सांजले, पूठे यो विचार ॥५॥ ॥ ढाल ॥ चोपा ।। ॥पहेला वीर जिणेसर पाय, प्रणमी गोयम गणहर राय ॥ कर जोडीने आगल रहे, सुललित नाषा एणी परें कहे ॥ ६ ॥ तुं जिन नक्ति मुक्ति दातार, तुज गुण कोश् न पामे पार ॥ में नेट्यो त्रिजुवननो देव, पुण्य पाप फल पूडं हेव ॥७॥ क्लतुं बोले वीर जिणंद, गोयम तुं आणे आणंद ॥ पूजे पृछा जे तुज गमे, तस हुँ उत्तर आपीश तिमे ॥७॥ आगे मयगलने मद जस्यो, एक पंचायणने पाखस्यो । आगे गोयमनुं जग वान, ला, वीर तणुं वली मान ॥ ए॥ नवियण नाव जलेरो धरी, अंग तणी आलस परहरी ॥ सुणजो हर्ष हिये उल्लसी, गोयमपृछा पूछे किसी ॥१०॥ जगवन् ! जीव नरक शें जाय, तेहज अमर जुवन सुर-थाय ॥ तिरियमांहे ते फुःख केम सहे, किशे कमें मानव नव लहे ॥१९॥ तेहिज़ पुरुष पणे संसार, कीशे कम ते याये नार ॥ कहो जिनवर पूरो मन रली, तेहज किशे Jain Educationa International For Personal and Private Use Only www.jainelibrary.org

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