Book Title: Karmvipak athwa Jambu Prucchano Ras
Author(s): Shravak Bhimsinh Manek
Publisher: Shravak Bhimsinh Manek
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(४५) बंधन मरणे थयो जयजीत ॥ दया करी मूकावे कोय, तसु शिर वेदन निखर नवि होय ॥ ए३ ॥ हियमें नेहने निविड परिणाम, अति अज्ञान महाजय जाम। कर्म आशातावेदनी घणुं, तव पामे एकेजियपणुं । ॥ ए४ ॥ पुण्य पाप परलोक न आज, त्रिजुवन को न थी शषिराज ॥ जे नर माने ईश्यो विचार, गोयम तेहने थिर संसार ॥ एy ॥ पुण्य पाप जे लोक मकार, ठे जिन सेवित सुगुरु नर नार ॥ महिमंमल मुनिवर ने सही, माने ते संसारी नही ॥ ए६ ॥ निर्मल ज्ञान थडे चारित्र, दर्शन नूषित देह पवित्र ॥ ते नर मरी तरी संसार, थाये शिवपुर तणो शिणगार ॥ ७ ॥
॥दोहा॥ ॥ गोयम पूनियु, वीरजिणेसर पास ॥ तक हियु त्रिजुवन गुरे, गिल्या वचन विलास ॥ एn नविक लोक तुमे सांजली, वाणी बहुत विचार | पु एय पापफल प्रगटवे, प्रीडो हृदय मकार ॥ एए॥ पृक्षा उत्तर बेहु मली, अडचालीश प्रमाण ॥ अरथ बहुल तुमे जाणजो, जग जयवंता जाण ॥ १० ॥ पढ्या गुण्या प्रीव्या तंणो, कवि कहे एहज मर्म ॥ दया से हित मादर करी, कीजे जिनवर धर्म ॥११॥
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