Book Title: Jin Vani
Author(s): ZZZ Unknown
Publisher: ZZZ Unknown

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Page 750
________________ ३. गर्भगृह के बाहर की दोनों ओर बराबर-स्थान छोड़ें | वेदी ठोस एवं परिक्रमा-स्थान छोड़कर ही बनायें | दीवार से सटी वेदी बनाना अशुभ है। वेदी के ठीक ऊपर बीम या गार्डर नहीं होना चाहिए | 3.Garbhagrha ke bahara ki donom ora barabara-sthana chorem | Vedi thösa ēvam parikramā-sthāna chorakara hī banāyēm. Dīvāra sē sațī vēdī banānā aśubha hai Vēdī kē țhīka Ūpara bīma yā gārdara nahīí hönā cāhi'ēl ४. वेदी की ऊँचाई ३ फुट रखें तथा वेदी पर एक या तीन कटनी ही बनायें, दो नहीं | 4. Vēdī kī ūńcāi 3 phuta rakhēm tathā vēdī para ēka yā tīna katanī hī banayem, do nahim | ५. वेदी में प्रतिमाएँ विषम-संख्या में ही विराजमान करें 5. Vēdī mēm pratimā'ēs visama-sankhyā mēm hī virājamāna karēm | ६. एक ही तल पर दो वेदियों का निर्माण न करें | 6. Ēka hī tala para do vēdiyām kā nirmāņa na karēm || ७. वेदी के पीछे खिड़की, झरोखा, अलमारी, द्वार कदापि न बनायें | 7. Vēdī kē pīchē khițakī, jharokhā, alamārī, dvāra kadāpi na banāyēm | ८. प्रतिमा जी को क्रय करने से पूर्व प्रतिष्ठाचार्य को अवश्य दिखायें | 8. Pratimā jī kā kraya karanē sē pūrva pratișthācārya ko avaśya dikhāyām ९. मूलनायक-प्रतिमा, प्रतिष्ठाकारक, नगर एवं तीर्थंकर की राशि का मिलान करके ही निश्चित करें | 9. Mūlanāyaka-pratimā, pratișthākāraka, nagara ēvam tīrthankara kī rāśi kā milāna karakē hī niścita karēm १०. मंदिर के मुख्य-द्वार के सामने खंभा, कुआँ, पेड़ न हो तथा वेदी के द्वार के सामने स्तंभ नहीं होना चाहिए | 10. Mandira kē mukhya-dvāra kē sāmanē khambhā, ku'āṁ, pēra na ho 750

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