Book Title: Gyansarashtakam
Author(s): Yashovijay
Publisher: Vadilal Mohakambhai Vakil

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Page 10
________________ // ॐ नमः सिद्धम् // DoGHeallelsealeravale आचार्य श्री विजयमहेन्द्रसूरि-संक्षिप्त-जीवनप्रभा रत्लामे नगरे स्वकोयमवने चेनाजी मार्यादली, तत्कुक्षेरसिते शुभग्रहगते मार्गे तृतीयादिने // जन्माऽभृद्भवतां (1953) त्रिवाणनिधिभू-संख्यायुते वत्सरे / सर्वेषां सुखशान्तिकारणपराः प्रादुर्भवा वै सताम् // 1 // ज्येष्ठो बन्धु सुकेसरीमल इति, ख्यातः सदा लालनात् / तारुण्येऽङ्कुरिते तदैव भवतां पित्रोस्तथा ह्यग्रजस्य स्वर्गे गमने ततो विवशतः पितृव्यपुत्रस्थले, चक्रुस्ते वसतिं विरक्तमनसो नाम्ना तु मिश्रीमलाः // 2 // श्रीदेवयोगाद्रतलामपुर्या, गण्यग्रणीसिद्धि मुनेनिवासः // चरित्रभावः प्रकटः स्वचित्ते, जातो हि तेषामुपदेशमात्रात् // 3 // श्रत्वा श्रीगणिवाणां, चातुर्मासीस्थितिं पुनः / महेशाणाभिधे ग्रामे, ततोऽगुः सिद्धिहेतवे // 4 // ततस्ते गणिराजानां, यानं भृगुपुरेऽभवन् / उपधानक्रियां कृत्वाऽहमदाबादकं ययुः // 5 // तस्माच्छीविजयान्तहर्षमुनिभिः सुप्रेरिता वा गताः / श्रीमन्नीतिगणिप्रसक्तमनसो ज्ञानाय तत्र स्थिताः // AEVA ACOCCA * स्वर्गस्थ विजयसिद्धिसूरीश्वर जी महाराज

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