Book Title: Gyansarashtakam Author(s): Yashovijay Publisher: Vadilal Mohakambhai Vakil View full book textPage 8
________________ ज्ञानसारे CHOCOCCIDETEOR आचार्य श्री विजयहर्षसूरीश्वर लघुजीवनप्रभा एतस्यामार्यभूमौ मरुधरविषये थांवलाख्ये प्रसिद्ध / ग्रामे धर्मे जिनोक्ते ह्यचलजिवणिजो दत्तचित्ताः पवित्राः // आसंस्तद्धर्मपत्नी विनयगुणयुता स्वामिसंसर्गसौम्या / भूरीदेवोतिनाम्नाऽभवदतिसरला जैनधर्मप्रवीणा // 1 // क्ष्मावेदाङ्केन्दुमाने (1941) धवलदलयुते फाल्गुने बाणतिथ्याम् / मासेऽब्दे वैक्रमाख्ये सुषुव इति सुतं गुर्विणी भूरिदेवी / तत्सूनो नामधेयं मृदुविमलतनो नामसंस्कारकाले। पित्रा शुद्धे मुहूर्ते निजकुलविधिना कारित हुमिचन्दः // 2 // बालोऽयवै शैशवशालिनी सः,सदावयस्यैमिलितोऽपि लीलाम् / प्राग्जन्मसंस्कारवलेन मुक्त्वाऽभवत्सुविद्याध्ययनप्रसक्तः // 3 // सद्विद्या समधीत्य लौकिकगुरोः पार्वे स वैराग्यमाक् / पित्रादिप्रतिबोधितोऽपि सततं धर्फकध्याने रतः // .. गार्हस्थारुचिको मुनीश्वरसमः सद्भावनां ध्यायति / श्रीमद् भागवती भवोदधितरी दीक्षाकदौदेष्यति // 4 // ध्यात्वेति श्राद्धवर्यः शमरसजलधिं शौधयन् सौम्यमूर्त-मज्ञानध्वान्तभानु गुरुममलहृदं गौर्जरी भूमिमाप // दाहोदग्राममध्ये कतिपयदिवसैश्चागतो हुमिचन्दः। आचार्यो नीतिमूरिन् मुनिगणसहितांस्तत्र दृष्ट्वा जहर्षे // 5 // सूरीश्वरं तं विधिनर्षियुक्तां / प्रदक्षिणीकृत्य प्रणम्य चोचे // मां हे कृपालो भववाधिमच्या-दीक्षा प्रदायाशु समुद्धर त्वम्॥६॥ नागेष्वकेन्दु (1958) वर्षेविमलदलयुते फाल्गुने स्कन्दतिथ्याम् / ग्रामे दाहोदनाम्नि प्रथमवयसि वै हुक्मिचंदोऽयमेव // आचार्याणां समीपे गुरुभिरथसमं नीतिसूरीश्वराणा-मङ्गीकृत्याशु दीक्षां व्यहरति ततोऽन्यत्र कल्पो मुनीनाम् // 7 // DOROUOCAGCABEDOEK // 8 //Page Navigation
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