Book Title: Ghantakarn Kalp Author(s): Chandanmal Nagori Publisher: Chandanmal Nagori Jain Pustakalay View full book textPage 3
________________ सर्वाधिकार लेखक ने स्वाधीन रखे हैं। प्राप्त वचन यथैषा विधिना लोके, न विद्यः गृहणाति यत् ॥ विपर्यय फलत्वेन, तथेदमपि भव्यताम् ॥१॥ भावार्थ-अविधि से ग्रहण की हुई विद्या मन्त्र-यत्र-तन्त्र यादि कुछ भी हो, विधान रहित ग्रहण की है तो वह विपरीत फल देगी श्रतः विधि-विधान को मान देना चाहिये । मद्रक: ईश्वरलाल जैन स्नातक आनन्द प्रिंटिंग प्रेस गोपालजी का रास्ता जयपुर । Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.comPage Navigation
1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 14 15 16 17 18 19 20 21 22 23 24 25 26 27 28 29 30 31 32 ... 72