Book Title: Anusandhan 2011 09 SrNo 56
Author(s): Shilchandrasuri
Publisher: Kalikal Sarvagya Shri Hemchandracharya Navam Janmashatabdi Smruti Sanskar Shikshannidhi Ahmedabad

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Page 11
________________ ऑगस्ट २०११ वडे अंकावेला एवो उल्लेख पण महत्त्वनो छे (गा. ७६). पित्त पीळ होय, तेथी कपाळे तेनाथी थयेल अंकन सोनानो भास करावतुं होय तो बनवाजोग छे. सौवीर देशना ए राजाए एक हजार गामोनुं साम्राज्य तजी दीक्षा लीधी; ते अन्तिम राजर्षि गणाया; तेमना मरणथी रोषे भरायेला देवोए शिलानी घोर वृष्टि करी हती (अने ते देशने उज्जड को हतो); अने तेओ उत्कृष्ट तपस्वी हता; आवी वातो आमां नोंधाई छे. १४. गा. ८३-८५मां सारण ऋषितुं वर्णन छे. ते मुनि नेमिनाथना वारामां थया हशे तेवू 'उज्जयन्तशैल'ना उल्लेखने लीधे (गा. ८३) मानी शकाय. १०० वर्षनो संयम, तेमां छठ्ठ-अट्ठमना तप, ए जोतां ते महातपस्वी हता तेम समजी शकाय छे. १५. गा. ८६-९२मां कृष्णना भाई बलदेव मुनिनी स्तुति छे. तेमनी तपस्यानुं वर्णन : सातमी (प्रतिमा) सातवार, आठमी ८वार नवमी ९ वार, १०मी १० वार; तो ६० मासखमण, ६० पासखमण, ४ चारमासी उपवास ! तेमनी रक्षा माटे देव सिंहनुं रूप लई जंगलमां साथे फरतो ! १६१७. गा. ९३-९४मां सेलगपुत्त-शिवनी, अने गा. ९५-१०१मां बाहुबलि मुनिनी स्तवना छे. १८. गा. १०३-११३ मां स्कन्दकुमार मुनिनी स्तुति थई छे. तेमनी साधनाना वर्णन दरमियान, 'रोहीडग' (रोहीडा) नगरनुं नाम आवे छे. त्यां तेमने कोई क्षत्रिये 'शक्ति' वडे प्रहार करेलो, ते आजे मारवाडमां छे ते ज रोहीडा हशे ? तो ते क्षेत्र घणुं पुरातन छे तेम मानवू पडे. ते मारनारने तेमणे जीवतदान अपाव्यु (गा. ११०) तेनी पण नोंध छ; तो पोताना, क्षत्रियवध करनारा पिताने प्रतिबोध आप्यानी वात पण नोंधेल छे (गा. १११). १९. गा. ११४-१२३ विष्णु(कुमार) मुनिनो वृत्तान्त वर्णवे छे. १६मा शान्तिनाथ जिनना वखतमां ते थया. (गा. ११४). ६० सहस्र वर्षो छ?तप तप्या. महापद्म नामे माण्डलिक राजा पासे, साधु-संघ खातर, ३ पगलां जग्या मागी (११६). ३ पगलांमां ३ लोक आवरी लीधा. छेवटे प्रायश्चित्त करीने सर्वार्थसिद्ध देवगति पाम्या. २०-२१. १२५-२७ गा. मां सुव्रतमुनिनी वात छे; तो १२८२९मां गोभद्र ऋषि, वृत्तान्त छे. आ मुनिने कुबेर यक्षराज द्वारा धर्मबोध मळेला, आ नाम पण प्रचलित नथी. २३. गा. १३०मां शिव ऋषिनी वात एक ज

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