Book Title: Vardhaman Tap Mahima Yane Shrichand Kevali Charitram Part 01
Author(s): Siddharshi Gani
Publisher: Vishva Shanti Prakashan
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________________ * 21 10 वहां भोजन कर योगी का वेष धारण कर उस नगर से बाहर निकला और देश देशान्तर भ्रमण करने लगा। भ्रमण करते हुए एक ग्राम में पानी की प्याऊ पर एक सिद्ध पुरुष को बैठे देखा / उस को नमन कर धरण पास में बैठ गया। उसे विनय आदि गुणों से युक्त देखकर सिद्ध पुरुष ने पूछा कि हे भद्र / तू कौन है ?" धरण ने सर्व हकीकत कह सुनायी / और उससे पूछा कि "मैंने दो मनुष्यों की हत्या का पाप किया है / उस पाप से मैं किस प्रकार मुक्त हो सकता हूँ ?' सिद्ध ने मन में विचार किया कि, 'घरण बहुत मुग्ध है, कारण कि अपनी गुप्त बात मुझे कहता है।" फिर वह बोला कि "मैं भी चिन्तित मन वाला हूँ। जिसका मन स्वच्छ होता है, उसकी बुद्धि भी अच्छी होती है / " .... ' धरण ने पूछा कि, 'आप श्रीमान् को कौन सी चिन्ता है ? ' सिद्ध ने कहा कि, 'मेरे गुरु ने सन्तुष्ट होकर मुझे एक विद्या दी थी / वह विद्या स्वर्ण से सिद्ध हो सकती है। यह चिन्ता मेरे मन में शूल की तरह दुख देती है।'' धरण ने पूछा कि "कितना स्वर्ण इसके लिए चाहिये ?' .... .. ...... . सिद्ध ने हंस कर कहा कि, 'हे बुद्धिशाली ! मुझे कितना स्वणं 6 सकेगा?" धरण ने कहा कि, 'मेरे पास बहुत से रत्न है।" धरण की उदारता तथा गुणों से सिद्ध प्रसन्न हुआ और विचारने लगा कि, यह भद्र मुझे जानता भी नहीं फिर भी मुझ पर P.P. Ac. Gunratnasuri M.S. Jun Gun Aaradhak Trust