Book Title: Vardhaman Tap Mahima Yane Shrichand Kevali Charitram Part 01
Author(s): Siddharshi Gani
Publisher: Vishva Shanti Prakashan
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________________ के बाद करनी चाहिये / स्त्री अत्यन्त निर्दयी होती है / स्त्री हिरण के सींग के समान टेड़ी होती है। नदी के समान नीचे जाने वाली होती है / वज्र जसी कठोर हृदय वाली होती है / स्त्री के चित्त में एक बात होती है, वचन में दूसरी और क्रिया में कोई तीसरी चीज नजर माती है / ऐसी मायावी स्त्रियों से कौन स्नेह करे / तू वृथा ही अपनी स्त्री की इतनी प्रशंसा करता है / " धरण ने पूछा कि, "हे मित्र ! इस तरह तुम कैसे बोलते हो?" वह बोला कि "हे मित्र ! मैं तुम्हारी स्त्री को अच्छी तरह जानता हूँ। वह एक दिन भी घर में नहीं रहती। मायावी आचरणों से स्नेह नहीं होना चाहिये / यदि तुझे मेरी बात का निर्णय करना हो तो परदेश जाने के बहाने से रात्री में परीक्षा कर लो।' 'धरण ने इसे स्वीकार किया। . ... धरण ने परदेश जाने की सम्मति बहुत कठिनाई से प्राप्त की। सारा दिन मित्र के घर विताया / रात्रि में उमा. घर से कहीं बाहर गई / मित्र के कहने से धरणघर में गुप्त तरीके से छुप गया और जिस प्रकार पहले दरवाजा बन्द था उसी प्रकार दरवाजा बन्द कर दिया। मित्र वापिस अपने घर चला गया। उत्साह से कुछ समय पश्चात उमा ने कहीं से वापिस आकर विशेष रसोई * आदि की तैयारी की इतने में एक पुरुष मुह को ढाँके हुए पाया प्राश्चर्य से धरण उसे देख रहा था.। मन में विचारने लगा कि 'यह कौन हो सकता है ? यह तो पापात्मा रणधीर है। यह क्षत्रिय-मेरे घर में किस लिए. पाया है।" P.P. Ac. Gunratnasuri M.S. Jun Gun Aaradhak Trust