Book Title: Vadodarama Shrimad Vijayanandsurishwarji Maharajna Sanghadana Muni Sammelane Karela Tharavo
Author(s): Jain Yuvak Sangh
Publisher: Jain Yuvak Sangh

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Page 13
________________ चौमासा करे छे, ज्यां साधुओना विहारथी अलभ्य लाभ थाय तेवे ठेकाणे जेमके मारवाड, मेवाड, माळवा, पंजाब, कच्छ, वागड, दक्षिण पूर्व विगेरेमा प्रायः साधुओनो जोईतो समागम नहिं मळवाथी जैन धर्म पाळनारा घणा अन्य धर्मी थई गया छे ने थता जाय छे. तो ते तरक साधु मुनिराजोन आ संमेलन ध्यान खेंचे छे ने भलामण करे छेके साधुओए गुजरात छोड़ी हिंदना दरेक भागमा विहार करवानी तजवीज करवी जोईए. ठराव सातमो. आपणा साधुओए अवश्य लोच कराववानो रिवाज जेवो छे तेवोने तेवोज राखवो. पण चक्षु प्रमुख रोगादिक कारणे क्षुर मुंडन करावq पडे तो गुरु आज्ञाथी महिने महिने शास्त्रानुसार करावq पण क्षुरमुंडन करावनाराओए चार के छ मास सुधी केश वधारवा नहि. ठराव आठमो. केटलाक गृहस्थो उपाश्रयमा कपडो लावे छे, ने साधुने वहोरावे छे ए शास्त्र विरुद्ध छे माटे आपणा साधुओए गृहस्थना मकाने जई खप पडे कपडा व्होरी लाववानो रिवाज राखवो, Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com

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