Book Title: Vadodarama Shrimad Vijayanandsurishwarji Maharajna Sanghadana Muni Sammelane Karela Tharavo
Author(s): Jain Yuvak Sangh
Publisher: Jain Yuvak Sangh

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Page 18
________________ (१०) ठराव एकवीसमो. साधु साधुना या श्रावकोना अंदर अदरना टंटा, बखेडामा आपणा साधुओए सामील थर्बु नहि कोई धार्मिक कारण परत्वे सामिल थवानी जरूर जणाय तो आचार्य महाराजनी परवानगी मंगाधी आज्ञानुसार वर्त. ठराव बावीसमो. ___ साधु साधूओमां सामान्य रीते एकज गुरुना परिवारमा पण जेवो जोईए तेवो संप देखातो नथी तो पछी जुदा जुदा गच्छना तथा जुदा जुदा गुरुओना साधुओमा तो संपर्नु नामज सेनुं होय ! आवी स्थिति हाल साधुओनी छे ते माटे आ संमेलन अत्यंत्य दिलगिरी दर्शावे छे. ने ठराव करे छ के आवा कुसंपथी साधु मात्रनो धर्मनिउन्नति करवानो जे मूळ हेतु छे ते पार पडतो नथी माटे आपणा साधुओए ते कुसंप दूर थाय तेवा इलाजो लेवा. ठराव त्रेवीसमो. आजकाल केटलाक साधुओ शिष्यो करवा देशकाल विरुद्ध Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com

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