Book Title: Vadodarama Shrimad Vijayanandsurishwarji Maharajna Sanghadana Muni Sammelane Karela Tharavo
Author(s): Jain Yuvak Sangh
Publisher: Jain Yuvak Sangh

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Page 20
________________ (१३) शा. मगनलाल. माणेकचंदे था. ममनलाल रणछोडदासना तर्फथी जैन मुनि संमेलनने लखेलो पत्र. श्रीपाचजीनप्रणम्य. श्री. वीरक्षेत्र मद्ये शान्त-दान्त महंत, आचार्यना ३६ गुणधारक आचार्यजी महाराज श्री विजयकमळ सुरीजी. तथा उपाध्यायजी महाराज श्री वीर विजयजी तथा प्रवर्तकजी महाराज श्री कान्तिविजयजी विगेरे साधु संमेलनमां पधारेला साधु महाराजो. आं नीचे सहीओ करनाराओनी नम्र विनंती ध्यानमां लई मागेलो खुलासों आपशो एवी आशा छे. आजकाल- केटलाक. श्रावको ग्रहस्थोने धर्म गुरु तरीके - मानवा. मनाववा. लाग्या छ ने तीर्थकर भगवाननी माफक तेमनी पुजा आरती वगेरे.करे कसवे छ केटलाक तो ग्रहस्थनी छबीने Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com

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