Book Title: Vadodarama Shrimad Vijayanandsurishwarji Maharajna Sanghadana Muni Sammelane Karela Tharavo
Author(s): Jain Yuvak Sangh
Publisher: Jain Yuvak Sangh
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(१४)
तीर्थकर भगवाननी प्रतिमानी माफक मानी ने भगवाननी प्रतीमा आगळ तेमनुं नाम लई जेवी भावना भवाय तेवी भावना ते गृहस्थनी छबी आगळ भावे छे. ग्रहस्थनी छबीने वचे पधरावी आजु बाजु तीर्थकर भगवाननी छबीओ मुके छे ते वचे मुकेली ग्रहस्थनी छवीने " आजीनने नमीए रे भत्रीका आजीनने नमीए" एम लांबा हाथ करी कहे छ ने तेम करी ग्रहस्थनी ते छबीने जानेश्वरनी छबी जेवं मान आपे छे वळी केटलाक श्रावको लाडी वाडीने गाडी विगेरे संसारिक विषय भोगमां रात दीवस रहवा छतां पोताते अध्यात्मी कहेवरावे छे.
मारपीछी कमंडलु विगेरे साधुना चिन्ह तरीके राखी पोताने श्वेतांबर संप्रदायना साधु पण कहवरावे छे.
आq आवु वर्तन करे करावे छे छतां पोते शुद्ध जैनधर्म पाळनारा छे. एयूँ कहे छे तो आ प्रमाणे करनार, करावनार, अने तेने अनुमोद. नारा जेओ होय तेमने जैन शास्राधारे केवा समजवा ने उपर जे वर्तन तेमर्नु बताव्युं छे तेवू वर्तन जैनशास्त्र प्रमाणे छे के केम ! साधु महाराजाओगें संमेलन. हमारी समजवा प्रमाणे आ पहेल्लुज छे तो आवा प्रसंगे हमारा पुछेला सवालाना शास्त्राधारे खुलाशा थशे तो तेथी Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com

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